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युवा शक्ति से भारत निर्माण के लिए युवा सामर्थ्य पर चिंतन, विचार आईडिया, संकल्प और आशा की प्रस्तुति :

आभार (प्रस्तावना)
 

युवा इस धरा के अमूल्य मानव संपदा हैं तथा युवा ही समृद्ध भारत के निर्माण के शिल्पकार हैं। इनके अपरिमित ऊर्जा को सही दिशा दिखाकर मानव मूल्यों पर आधारित सुन्दर समृद्ध मानव समाज का निर्माण करने की असीम संभावनाएँ हैं। इतिहास कहता है कि युवा संपदा से कई गौरवशाली मानव सभ्यता का निर्माण हुआ है। भारतीय युवाओं ने इसे कई अवसरों पर सिद्ध कर दिखाने में सफलता पाई है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हम पाते हैं कि वे राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत होकर पूर्ण निष्ठा और निष्काम भाव से राष्ट्र के लिए अपना जीवन को समर्पित करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे। ऐसे कर्मयोगी युवाओं पर हम सब को गर्व है और इसी का फलाफल था कि भारत को स्वतंत्रता मिली। स्वतंत्रता के बाद भी युवाओं ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश के बनाने में अपना अत्यंत महत्पूर्ण भूमिका निभाई है। हम देख पा रहें हैं कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद समूचे देश में सभी क्षेत्रों में युवाओं के द्वारा अनेकों उत्कृष्ट कार्य किये जा रहें हैं। शांति और समृद्धि की स्थापना में इनकी सबसे बड़ी भूमिका रही है। युवाओं का ही पुरूषार्थ का कर्मफल है कि आज भारत हर क्षेत्र में निरंतर प्रगति के पथ पर शांति के साथ अग्रसर है। वर्तमान भारत युवा शक्ति में विश्व का सबसे बड़ा देश है। युवाओं की शक्ति व संभावनाओं का उद्घाटन भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्रीमान् नरेन्द्र मोदी जी कई विशिष्ठ अवसरों पर कर चूके हैं। इस विराट युवा शक्ति के संदर्भ में हमें अध्ययन से एक सत्य उद्घाटित होता है कि आजादी के बाद भारत में व्यापक स्तर का प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित नहीं हो पाया है, जो भारत के 80 करोड युवाओं का मार्गदर्शन करें, उनके 160 करोड़ हाथ को परस्पर जोड़कर उनके सामथ्र्य से साक्षात्कार कराए और उन्हें समृद्ध भारत व समृद्ध विश्व के लिए उनकी अपरिमित ऊर्जा को दिशा दिखा कर नियोजित करें। स्पष्ट है कि ऐसे सशक्त संगठन के अभाव में 21 वीं सदी का युवा हताश, निराश, असंतुष्ट और परेशान होता रहा है, क्योंकि अधिकांश युवाओं के मस्तिष्क व हाथ के पास कोई काम नहीं है। वास्तव में यह ईश्वर द्वारा प्रदत्त स्वाभाविक युवा शक्ति की बड़ी क्षति है जहाँ एक स्वाभाविक अपरिमित ऊर्जा बिना किसी उपयोगी परिणाम के ही नष्ट हो रहा है। इसे रोकना हम सब का दायित्व और कत्र्तव्य है और हमें इस ओर चिंतन, विचार, आइडिया, रास्ता की खोज करने तथा लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संकल्प करने की नितांत आवश्यकता है। इसी आवश्यकता तथा महात्मा बुद्ध की शिक्षा ने हमें चिंतन, विचार के लिए प्रेरित किया जहाँ उन्होने मैत्री (एक दूसरे को सम्मान देना) को आधार बना कर शांति व समृ़िद्ध की स्थापना की थी।
हमारे चिंतन, विचार के द्वारा एक आइडिया का सृजन हुआ और हमने संकल्प किया कि उस आइडिया को हम सर्व-प्रथम धरातल पर प्रस्तुत करेंगे। संकल्प की प्राप्ति हेतु 12 जनवरी 2010 ई0 में सूक्ष्म स्तर पर 10 शिक्षित युवाओं का समूह ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ के रूप में बना कर कार्य प्रारम्भ कियें। समूह ने आकांक्षा के अनुरूप पूर्ण निष्ठा से कार्य किया जिसका परिणाम हुआ कि कार्यक्षेत्र में युवाओं एवं आमजन से संबंधित अनेक गंभीर समस्याओं का निराकरण सरलता पूर्वक से हुआ है। इससे हमें प्रेरणा मिली और आशा जागृत हुआ कि भारत में एक प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित कर भारत में व्याप्त विविध गंभीर राष्ट्रीय समस्याओं का हल खोजा जा सकता है। समस्याओं के स्थायी निराकरण होने से भारत को समृ़द्ध राष्ट्र व सपनों का भारत बनाया जा सकता है। इस सपनो के भारत के लिए ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ का सृजन हमारे चिंतन विचार के द्वारा आइडिया के रूप में हुआ जो भारत के युवा मस्तिष्क को प्रेम और बधुत्व से परस्पर जोड़ने का काम करेगा इसे ही हम सूत्र/रास्ता/आइडिया कहते हैं और इस आइडिया का आधार मैत्री है। हमने अपने आइडिया के अनुरूप कार्य प्रारंभ किया और अपने कार्यानुभव से पाया कि एक प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित करने से देश में व्याप्त कई गंभीर समस्याओं का निदान सरलता से हो सकता है। अतः हमारा निवेदन सरकार एवं समाज से है कि एक सशक्त व प्रतिबद्ध युवा संगठन राष्ट्रीय 4 संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीय युवा विकास संघ स्तर पर विकसित करने के लिए अपना योगदान दें और इस ओर दूसरों को प्रोत्साहित भी करें। सम्पूर्ण देश में ऐसे प्रयास से हम राष्ट्रीय स्तर का सशक्त व प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित करने में सफल हो सकते हैं। हमारा अनुभव कहता है कि इस प्रकार के सही सोच व प्रयास से युवाओं की भूमिका बढ़ेगी, उनमें आशा जागेगी वे अपना समय व ऊर्जा देश और राज्य के हित में लगाएँगे और इस कार्य में वे सदैव सक्रिय रहेंगे। युवाओं के सक्रियता से ही राष्ट्रीय स्तर का प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित किया जा सकता है। इस युवा संगठन के बल पर राष्ट्र सामथ्र्यवान होगा साथ ही युवाओं का विश्वास और मनोबल सदैव उच्च और स्थिर रहेगा। युवाओं का अपरिमित शक्ति व ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र के उन्नति लिए हो सकेगा तब सपनों का समृद्ध भारत वास्तविक आकार लेगी। हमारे चिंतन, विचार के द्वारा सृजित आइडिया को आकार देने में श्रीमान् रामटहल चैधारी, मान्नीय सांसद, राँची, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमान् अर्जुन मुण्डा, राज्य के मंत्री श्रीमान् नीलकंठ सिंह मुण्डा, श्रीमान अमर कुमार बाउरी, मा0 विधायक श्रीमान् रामकुमार पहान, डाॅ0 जीतू चरण राम कांके प्रमुख श्रीमान सुदेश उराँव, साधो उराँव मुखिया,नेवरी एवं अन्य मंत्री, विधायक, क्षेत्र के प्रबुद्धजन श्रीमान् पन्ना लाल महतो, संजीव कुमार, रामलखन मेहता, राधाचरण सिंह एवं अन्य अधिकारी जिला उपायुक्त, बी.डीओ., सी.ओ., पुलिस पदाधिकारी एवं अन्य अधिकारी एवं युवा साथी श्री सुबोध कुमार, शकील परवेज अली अंसारी, मनोज वाजपेयी, तालकेश्वर महतो, बबलू राम, सतीश सिंह, कामेश्वर महतो, लक्ष्मी साहु, विजय सिंह, बालेश्वर पाहन, अमरेश झा, अनुराग कुमार, मनोज ठाकुर, संजय महतो बहादूर, रणधीर कुमार चैधरी, जय कुमार महतो, विवेक, बिक्रम, राजीव, अमृत कुमार सिंह, ऋषिकेश सिंह, उमेश राय, कैलाश महतो, दुबराज साहु, भरत साहु, शिवा साहु, गोविंद महतो, साकिर अलि, दीपक, प्रदीप, रंजन कुमार, संदीप उराँव, अशोक साहु, गुरूचरण मुण्डा, विनोद उराँव, पप्पु महतो, रामलखन मुण्डा, नरेन्द्र कुमार इत्यादि युवा साथी महत्वपूर्ण भूमिका निरंतर निभा रहें है। सभी ने अपने अदम्य साहस और संकल्प के साथ ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ द्वारा प्रतिपादित संकल्प में अपना योगदान सुनिश्चित कियें हैं जिसके लिए हम आभारी हैं।
आपका
राष्ट्रीय युवा विकास संघ
झारखण्ड प्रदेश, राँची

-ः निवेदन:-

मान्यवर,
जन सामान्य, युवा, युवतियाँ, माताएँ, बहनें, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री, नेता, नौकरशाह, सांसद, विधायक, निगम प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य संभी भारतीय समाज के अगुआ। निवेदन पूर्वक आप सबों से आग्रह है कि समृद्ध भारत (ज्ञान, शील, एकता, शांति, प्रेम, उन्नति, वात्सल्य, सौहार्द, भाईचारा, कौशल, सर्वजन रोजगारयुक्त भारत) निर्माण के लिए मन, वचन व कर्म से आगे आएँ। हम सब के सामुहिक व सम्मिलित प्रयास के द्वारा ही भारत का नवनिर्माण संभव है। भारत के नव निर्माण में ही हम सब का सुनहरा भविष्य है। हम सब का दयित्व व कत्र्तव्य भी है कि अपने महान देश के पुर्ननिर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित करना चाहिए। यदि हम सामान्य नागरिक हैं तो अपने क्षमता व बुद्धि के अनुसार अपना योगदान सुनिश्चित करना चाहिए, यदि आप नेता मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, नौकरशाह हैं तो अपने सामथ्र्य के अनुसार भारत के कायाकल्प में अपना योगदान सुनिश्चित करना 5 संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीीय युवुवा विकास संघ्ंघ चाहिए। यदि आप समाज के अगुवा वर्ग हैं तो अपने ज्ञान व बुद्धि से भारतीय समाज को समृद्ध भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करना चाहिए। इस प्रकार प्रत्येक स्तर के प्रयास के शक्ति से भारत निश्चित ही समृद्ध भारत होगा जहाँ ज्ञान, एकता, शील, समभाव, सौहार्द, प्रेम भाईचारा इत्यादि का जन्म होगा इससे मानव समाज में शांति का वातावरण होगा जिससे मानव मस्तिष्क की उर्वरता बढ़ेगी जहाँ रचनात्मक एवं सृजनात्मक कार्य होंगे और ऐसे सुन्दर वातावरण में ही समृद्ध भारत की संकल्पना आकार धारण करेगी जो हम सब की आवश्यकता है। अतः भारत का नवनिर्माण कैसे हो? वर्तमान देशव्यापी भीषण समस्याओं का स्थायी समाधान का रास्ता क्या हो? विशाल युवा शक्ति कैसे सुनियोजित हो? मानव द्वारा उत्पन्न आपदाओं पर नियंत्रण कैसे हो ? इत्यादि विषयों के निदान हेतु चिंतन व विचार के द्वारा राह खोज करने की आवश्यकता है। हम सब को अपने समृ़द्ध भारत के निर्माण के लिए चिंतन व विचार के द्वारा राह व आईडिया की खोज करना चाहिए।हमने इस ओर चिंतन व विचार किया और पाया कि भारत युवा शक्ति का विश्व का सबसे बड़ा देश है जो हमारी सबसे बड़ी प्रकृति प्रदत स्वाभाविक ताकत व शक्ति है। इस ईश्वर प्रदत शक्ति के बल पर हम समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में यह शक्ति विभाजित है जिसके कारण इसके सामथ्र्य का प्रदर्शन नहीं हो रहा है। समय की मांग है कि इस विराट युवा शक्ति को भारत के नवनिर्माण के लिए एक सूत्र में जोड़ने की आवश्यकता है। युवा शक्ति के परस्पर जुड़ाव के द्वारा भारत के प्रत्येक घर तक पहुँच बन सकता है और इसके द्वारा सम्पूर्ण देश में एक सुसंस्कृति विकसित की जा सकती है। भारत के विशाल युवा शक्ति को सामुहिक प्रयास से एक सूत्र में जोड़ा जा सकता है हमारा छोटा अनुभव कहता है कि यह अवस्था ही समृद्धि का प्रतीक होगा। युवाओं के स्वाभाविक जुडाव के लिए हमने अपने चिंतन में पाया कि आजादी के बाद भारत में व्यापक स्तर का प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित नहीं हो पाया है, जो भारत के 80 करोड युवाओं का मार्गदर्शन करें, उनके सामथ्र्य से साक्षात्कार कराए और उन्हें समृद्ध भारत के लिए दिशा दिखाए और उनके हाथ को काम सौंपे। स्पष्ट है कि ऐसे सशक्त संगठन के अभाव में 21 वीं सदी का युवा हताश, निराश, असंतुष्ट, कुंठित और परेशान होता रहा है, क्योंकि अधिकांश युवाओं का मस्तिष्क व हाथ के पास कोई काम नहीं है। यह स्थिति ही समस्या का मूल कारण है। हमने अपने चिंतन में पाया कि युवाओं को संगठित और सुसंस्कारित कर समस्याओं का निदान स्थायी रूप से किया जा सकता है।
इसके लिए हमने संकल्प किया कि समृद्ध भारत के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित करेंगे । इस संकल्प हेतु अपने चिंतन व विचार के द्वारा आइडिया के रूप में सृजन ‘‘राष्ट्रय युवा विकास संघ’’ की सथापना सन् 2010 ई0 में हुआ। हमारा विश्वास है कि यह भारत के नवनिर्माण का नूतन सुन्दर व सरल रास्ता होगा। अतः हमारा निवेदन मानव समाज है कि सपनो के सम्द्ध भारत के लिए ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ के विकास के लिए आप सभी आगे आएँ। हमें आशा है कि जिर्स अिभप्राय से यह संघ बनाया गया है आप सब के सहयोग से ही अपने निर्धारित लक्ष्य समृद्ध भारत का सपना को पूरा करेगा ।
आपका
राष्ट्रीय युवा विकास संघ
झारखण्ड प्रदेश, राँची

राष्ट्रीय युवा विकास संघ का वचन

राष्ट्र सेवा ही हमारा प्रथम कत्र्तव्य है।
राष्ट्र का गौरव ही हमारा गौरव है।।
लक्ष्य
युवा शक्ति से समृद्ध भारत का निर्माण हमारा संकल्प है।
हम अपने कर्म, पुरूषार्थ, अनुभव, ज्ञान, शाील, विन्रमता, तत्परता, सक्रियता का उपयोग भारत निर्माण
में करेंगे।
हम अपने ज्ञान व अनुभव को राष्ट्र के निर्माण में नियोजित करेंगे।
हम अपने पुरूषार्थ से समृद्ध भारत का निर्माण करेंगे और देश की शोभा बढ़ाएँगे।
सिद्धांत
हम सदैव ईमानदार, कत्र्तव्यनिष्ट, पारदर्शी, नैतिक, पुरूषार्थी रहेंगे।
हम बुजुर्गों, माताएँ, बहनें, व भाइयों का सदैव सम्मान करेंगे।
हम प्रत्येक मानव के गरिमा को बनाएँ रखने में स्वयं का योगदान सुनिश्चित करेंगे।
हम जाति, धर्म, गरीबी, अमीरी इत्यादि के दीवार को सेतु बनाने में अपने प्रेम, ज्ञान व अनुभव का
प्रयोग करेंगे।
हम बिना किसी भेद भाव के भारत का गौरव बढ़ाने में अपना योगदान सुनिश्चित करेंगे।
भारत हमारी माँ है हम सब भारत माँ की संतान हैं, हम सभी भारतवासी भाई-भाई हैं, यह हमारी
भावना है।
आइयें हम सब मिल कर अपने सम्मिलित पुरूषार्थ से सपनों का समृद्ध भारत का निर्माण करें।
-ः निवेदक:-
राष्ट्रीय युवा विकास संघ, झारखण्ड, प्रदेश, राँची

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीीय युवुवा विकास संघ्ंघ

ःः स्रोत:ः
1. स्वामी विवेकानन्द जी के आर्दश, सिद्धांत और दृष्टि।
2. प्रकाशित देश के सरकारी आंकड़ो ।
3. समाचार – पत्र (प्रिंट मिडिया)
4. पत्रिकाएँ
5. न्यूज (इलेक्ट्रोनिक मिडिया)
6. विभिन्न विद्वानों के सुविचार।
7. प्रधान – मंत्री श्रीमान् नरेन्द्र मोदी जी का ‘‘मेक इन इण्डिया’’ की अवधारणा।
8. भारत का इतिहास।
9. सांसद, राँची श्रीमान् रामटहल चैधरी जी का अनुभव और मार्गदर्शन।
10. देश के महान नेता स्व0 सुभाष चन्द्र बोष, स्व0 महात्मा गांधी, स्व0 नेहरू, स्व0 राजेन्द्र प्रसाद, स्व0 लालबहादूर शास्त्री, स्व0 इन्दिरा गांधी,
स्व0 राजीव गांधी, श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी इत्यादि के उद्बोधन और दृष्टि का अध्य्यन।
11. जापान और इजराइल के उत्कृष्ट युवा उद्यम ।
12. लोकनायक जयप्रकाश जी की जीवनी।
13. शहीद बिरसा मुण्डा, भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, राजगुरू इत्यादि की जीवनी।
14. युवाओं का अपरिमित ऊर्जा और उसके उपयोग से समृद्ध भारत की निर्माण पर हमारा अनुभव।
15. 7 वर्षों का कार्यानुभव इत्यादि।

अनुक्रमणिका

1. हमारी चिंता और आशा
2. भारत के युवा सामथ्र्य का स्वरूप
3. चिंतन व विचार
4. आइडिया
5. संकल्प
6. राष्ट्रीय युवा विकास संघ की भूमिका
7. अभियान
8. कार्य परिणाम एवं अनुभव
9. संभावनाएँ
8 संकल्प से सिद्धि की ओर

राष्ट्रीय युवा विकास संघ हमारी चिंता और आशा

भारत की यह युवा पीढ़ी नयी तथा नाजुक है और मानव जीवन में यह अवस्था सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। भारत की इस महान धरती की विकसित सुसंस्कृति से इस युवा पीढ़ी को विकसित (क्मअमसवच) करने की आवश्यकता है। हमारी सुसंस्कृतियों की सबसे गहरी जड़ों में एक अनिवार्य एकरूपता है, जहाँ मानवीय सहअस्तित्व की सच्ची एकता स्थापित करने वाले तत्व विद्यमान हैं। इन्हीं विद्यमान तत्वों से इस युवा पीढ़ी को विकसित करने हेतु सामूहिक व सार्थक प्रयास होना चाहिए क्योंकि हमें यह जानना होगा कि कुछ दशकों के भीतर पृथ्वी की जलवायु में सीमा से बहुत अधिक परिवर्तन हो रहा है और यह परिवर्तन मानव जीवन के अस्तित्व को संकट में डाल रहा है। मनुष्य अपनी बढ़ती आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प्राकृतिक संसाधनों, जीवों तथा वनस्पतियों का अत्याधिक दोहन निरंतर कर रहा है जिसका परिणाम भी बड़ा घातक होता जा रहा है। दूसरी ओर वर्तमान में आतंकवादियों के नियंत्रण में बहुत अधिक संहारक संभावना आ चुकी है। वे लगातार शांति व समृद्धि के सबसे बड़े बाधक बनते जा रहें हैं। यह मानव समाज के लिए बड़ी चिंता का विषय है। ऐसा लगता है कि मानव मस्तिष्क का एक तार्किक हिस्सा जिसने अनेक अन्वेंषण किए और जिसके परिणामस्वरूप असाधारण विकास हुआ है, जबकि दूसरा हिस्सा जिसे यह सुनिश्चित करने की सावधानी रखनी चाहिए थी कि वे सभी अन्वेषण मानवता की सेवा के लिए हो। वह नैतिक हिस्सा वर्तमान में अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है, जिसके कारण ही मानव सभ्यता के विनाश की संभावनाएँ बढ़ चली है। इसके नियंत्रण के स्थायी उपाय खोजे जाने की नितांत आवश्यकता है। हमें मानवीय दायित्व के विन्दु पर चिंतन करना चाहिए जहाँ से हमारी सभ्यता के सामने खड़े मौजूदा संकट का समाधान का सूत्र सृजन हो। वास्तव में किसी भी सभ्यता के विकास में युवाओं का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता रहा है। भारत की इस युवा पीढ़ी में अपार संभावनाएँ है तथा इस युवा शक्ति को सही दिशा प्रदान करने से आने वाले संकटों को पूरी तरह से नियंत्रित किया सकता है। यदि हम अपने इस विराट युवा शक्ति को मानवता के दायित्व बोध कराने में सफल हुए तो निश्चित ही संकट को समाधान करने की दिशा में बड़ा कदम होगा और सामूहिक प्रयास के द्वारा इसे प्राप्त किया जा सकता है। हम सभी जानते हैं कि हमारी संस्कृति हमें
सभी के प्रति सम्मान की शुद्ध भावना धारण करने की प्रेरणा प्रदान करती है। उसी प्रेरणा से सम्पूर्ण ब्राह्मांड के प्रति, धरती के प्रति, प्रकृति के प्रति जीवन तथा वास्तविकता के प्रति, दूसरे लोगों के प्रति, दूसरे देशों के प्रति तथा दूसरी संस्कृतियों के लिए हमारा प्रेम, आदर एवं सम्मान का शुद्ध भाव विकसित करना होगा। इसे और आगे ले जाते हुए हमें जनसामान्य के सोंच में ब्राह्मांडीय व्यवस्था के प्रति एक विनम्र सम्मान की अत्यंत लोकतांत्रिक व्यवस्था विकसित करना होगा और यह तभी होगा जब भारत के इस युवा पीढ़ी को विकसित करेंगे। इसके लिए हमारे सम्मानित बुजुर्गो का अनुभव और युवाओं की शक्ति को जोड़ना होगा। हम इस पर सफल हो जाएँ तो भारत ही नहीं वरन् विश्व को शांति व समृद्धि की एक सर्वोत्तम राह दिखा सकते
हैं, लेकिन हमारे लिए अत्यंत चिंता का विषय यह है कि वर्तमान में इस विराट युवा पीढ़ी को सबसे अधिक खतरा हमारे कुछ स्वार्थी राजनीतिज्ञों से है। नित्य दिखाई दे रहा है कि कुछ राजनेताओं का मुख्य उद्देश्य अपने वोट के फसलों को किसी भी हद तक जाकर उत्पादन करना तथा टेलीविजन पर अपनी मुस्कान विखेरते हुए जनसमर्थन हासिल करना इसके साथ चुनाव जीतना और अपने अंतिम दिनों तक के सुख सुविधा सुनिश्चित करना ही रह गया है, जबकि उनकी भूमिका बिलकुल भिन्न व अलग होना चाहिए। उन्हें अपने हिस्से का दायित्व स्वीकार करते हुए भारत की दीर्घकालिक संभावनाओं के लिए योजना बनाना चाहिए। उन्हें जनता के बीच एक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए जिनके नजरों के सामने वे कार्य करते हैं।

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीीय युवुवा विकास संघ्ंघ

अप्रसन्नता से भयमुक्त रहते हुए साहस से आगे देखना और अपनी कार्य योजनाओं को आध्यात्मिक आयाम से युक्त मानव विकास के लिए कार्य करना चाहिए। निश्चित रूप से राजनीति ही वह साधन है जहाँ सुधार की अपार संभावनाएँ हैं। हमारे देश के राजनेताओं को सदैव जनता तथा अपने सहयोगियों को बार – बार समझाते रहना चाहिए और स्वयं भी समझना चाहिए कि राजनीति को किसी खास समूह अथवा धर्म, जाति के हित साधने के बजाय कुछ अधिक करने की आवश्यकता है। सैद्धांतिक व व्यवहारिक दोनों ही रूपों में राजनीति जनसेवा का सबसे बड़ा जरिया है, जिसका वास्तविक अर्थ शुचिता व नैतिकता को व्यवहार में उतारना है। हमारे कुशल राजनीतिज्ञों पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण जिम्मेवारी है कि समृद्व भारत के निर्माण के खातिर आध्यात्मिक स्त्रोतों के द्वारा इस युवा पीढ़ी के लिए एक नयी प्रभावी व्यवस्था विकसित करने का साहसिक कार्य करें जहाँ मानवीय दायित्वों का निर्वहन प्रत्येक मनुष्य के द्वारा किया जाना सुनिश्चित हो, परन्तु हमारा दुर्भाग्य है कि इस ओर बढ़ने में असफल हो रहें हैं।
निश्चित ही वह असफलता मूल कारण है जिससे भारत की इस युवा पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी समस्या उनकी समायोजन का हो गया है। समायोजन नहीं हो पाने कीे स्थिति में वे अपनी भूमिका को पहचान नहीं कर पा रहें हैं जिससे उनके जीवन में भटकाव जन्म ले रहा है और यह भटकाव ही समस्याओं
का मूल कारण है। जैसा कि यह युवा पीढ़ी नयी और नाजुक है । इसलिए विश्व में हो रहें परिवर्तनों को अत्यंत तीव्र गति से खुद में बगैर कोई आवश्यक बदलाव लाये उसे एक चकरा देनेवाली तत्परता से अपना रहा है। इस परिवर्तन में संतुलन नहीं होने के कारण हम अपने स्थापित सुसंस्कृति के मूल भावना से भटक रहें है। वर्तमान समय में इस बात की आवश्यकता है कि हम अपने मौलिक आध्यात्मिक और नैतिक तत्वों को फिर से याद करें जो मानवता के उसी मूलभूत अनुभव से विकसित हुए। इन तत्वों का अनुभव और ज्ञान इस युवा पीढ़ी को परिपक्वता प्रदान करेगा। यह परिपक्ता से हम अपने तथा इस विश्व के प्रति अपने दायित्वबोध का सच्चा नवीकरण संपन्न कर सकते हैं। इस तरह से हम विभिन्न संस्कृतियों के बीच उस गहरी समझ को हासिल कर सकेंगे और यही रास्ता होगा जो उन्हें साथ मिलकर एक नयी विश्व – व्यवस्था को सृजित करने में समर्थ है। यदि हम ऐसी व्यवस्था के निर्माण में सफल हुए तो निश्चित ही जनसामान्य के बीच यह जागरूकता विकसित होगी जहाँ हम भली-भाँति समझ पाएँगे कि हम इसके हिस्से हैं और इसके साझीदार भी है। हम जान पाएँगे कि हम जो कुछ भी करते हैं वह विनष्ट नहीं होता बल्कि अस्तित्व की शाश्वत स्मृति का हिस्सा बन जाता है, जहां उसका सम्पूर्ण रूप से मूल्यांकन किया जाता है। इस व्यवस्था को विकसित होने से हम कर्मयोग के महान सिद्धांत की ओर बढ़ चलेंगे जहाँ मानव
विकास की अपार संभावनाएँ हैं। इस प्रकार युवाओं के मन में भारत के प्रति एक नया दायित्वबोध कराना प्रत्येक जिम्मेवार नागरिक का दायित्व होगा। इस महान दायित्व का विशेष भार देश के राजनेताओं, शिक्षकों, शिक्षाविदों, विद्वानों विदुषियों, धार्मिक शिक्षकों, शिक्षिकाओं, कलाकारों, उद्यमियों, पत्रकारों तथा सार्वजनिक जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय लोगों पर सबसे अधिक होगा क्योंकि यही वह वर्ग है जिसमें दायित्वबोध कराने की स्वाभाविक क्षमता है।इस बौद्धिक वर्ग के द्वारा प्रत्येक मनुष्य के अन्दर जो एक अंतरात्मा, एक दिव्यता होती है जो सामान्यतः सोयी रहती है, उसे भी जागृत किया जा सकता है। वह एक ऐसी अनमोल ईश्वर प्रदŸा चीज है जो जागृत होने पर मानवीय दायित्वों का बोध मनुष्यों के बीच स्वभाविक रूप से होता हैं। भारत की यह युवा पीढ़ी नयी और नाजुक है और इसे मानवीय दायित्वों का बोध हो सकता है जिसके लिए यह सबसे अधिक युवाओं पर आश्रित है। अतः इस विराट युवा शक्ति को हमें नियंत्रण और समायोजन करने के लिए सामूहिक प्रयास करना होगा। इसकी सफलता में ही हम सभी का भविष्य सुन्दर आकार लेगी। यह हमारी अस्तित्व से सीधा जुड़ा हुआ बड़ा व्यापक उद्देश्य है जिसे प्राप्त करना ही हमारी चिंतन का मुख्य केन्द्र है।

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीय युवा विकास संघ

युवा सामथ्र्य और हमारा देश भारत समृद्व भारत के निर्माण का आश्वासन का आधार भारत की युवा शक्ति ही है। हम महान अनासक्त कर्मयोगी, देश भक्त, भारत रत्न, पूर्व राष्ट्रपति स्व0 डाॅ0 एपीजे अब्दुल कलाम जी को श्रद्धांजली अर्पित करते हुए उनके समृद्ध भारत के संकल्पना को पूरा करने का संकल्प करते हैं और हम होंगे कामयाब एक कार्यक्रम में उनके द्वारा अपने देश के युवाओं के लिए दिए दिव्य संदेश से अपनी बात को प्रारंभ कर रहें हैं जिसमें उन्होने कहा था कि ‘‘हमारे सभी युवाओं में अदम्य साहस होना चाहिए, अदम्य साहस के दो अंग हैं, पहला,अपना एक लक्ष्य बनाओ और फिर उसे पाने की दिशा में जुट जाओ तथा दूसरा, यह कि कार्य करते समय बाधाएं तो आयेगी ही, अतः बाधाओं को अपने उपर कदापि हावी मत होने दो, अपितु बाधाओं को अपने साहस और बुद्धि के बल पर नियंत्रण में रखो, उसे अपने पुरूषार्थ और पराक्रम से परास्त करो और सफल बनो। यह सौभाग्य की बात है कि अपने देश में युवा संपदा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। हमारे तेजस्वी, मेधावी और पुरूषार्थी युवा इस धरा पर, धरा के नीचे तथा धरा के ऊपर विद्यमान किसी भी संपदा से अधिक श्रेष्ट है। जब कोई तेजस्वी मन अदम्य साहस के साथ कार्य में जुट जाता है तो वह एक समृद्धशाली, खुशहाल तथा सुरक्षित भारत के प्रति हमें आश्वस्त करता है। एक छात्र तथा एक युवा के रूप में आप अपना एक लक्ष्य निर्धारण कर उस पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हुए बाधाओं को परास्त कर विजय को प्राप्त करें और उसमें उत्कृष्टता अर्जित करके अपना सहयोग दें। युवा नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करें तथा उद्यमी बनने का प्रयास करें। अवकाश के दिन निर्धन, कमजोर, तथा सुविधाओं से वंचित बच्चों को पढ़ाएँ और उनके जीवन के लिए एक मिशन का निर्माण करें।‘‘ हमारा मानना है कि उनके द्वारा बताए मार्ग को पूरी श्रद्धा से आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजली होगी। युवा संपदा को प्रेरित और विकसित कर हम समृद्ध भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं। वर्तमान भारत युवा शक्ति का विशाल देश है, तात्पर्य,मानव संपदा की बड़ी संख्या से है उसमें भी 65 प्रतिशत संख्या युवाओं का होना स्वयं ही ईश्वरीय दिव्यता है। युवा अर्थात, जिसमें अपरिमित ऊर्जा, उत्साह, साहस, शक्ति विद्यमान रहता हो। इतिहास साक्षी है कि युवा इन्हीं शक्तियों के बल पर राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण (कायाकल्प) करने में पूर्ण सफल रहें हैं। इस श्रृंखला में हम देखते है कि विश्व में लगभग सभी क्रांति युवाओं के शक्ति और पुरूषार्थ से प्राप्त हुई हैं तथा यह भी पूर्ण सत्य है कि किसी भी परिवर्तन में हमारे बड़े और बुजर्गों का अनुभव और मार्गदर्शन साथ रहा है। यदि हम भारत के स्वतंत्रता संग्राम का अध्य्यन करें तो ज्ञात होता है कि युवाओं की ही ढृढ इच्छा शक्ति की ताकत थी जिसने अंग्रेजी सरकार की नींव हिला दी थी तथा भारत के जन मानस को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया। अपार संभावनाओं से पूर्ण भारत अपने विशाल मानव संपदा का सुदपयोग नहीं करने के कारण अपेक्षित विकास से दूर होता रहा है। इस संदर्भ में प्रायः हम देखते हैं कि भूगर्भ से कोयला की निकासी के लिए हमारी सरकार हजारों करोड़ रूपया की निवेश करती है और इस कार्य में बड़े पैमाने पर उत्तम प्रकार की तकनीक प्रयोग में लाई जाती है। इस प्रकार बड़े व ठोस प्रयास के द्वारा भूगर्भ से कोयले की निकासी कर कोयले की शक्ति को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित की जाती है जिससे कि मानव की भौतिक व दैनिक अनेक अवश्यकताओं की पूर्ति होती है। लेकिन हम अपनी मानव संपदा और उसमें 80 करोड़ युवा के अपरिमित शक्ति को सदुपयोग करने में कोई ठोस नीतिगत प्रयास नहीं करते हैं और न ही भविष्य के लिए रास्ता का सृजन कर रहें हैं जिससे कि युवा शक्ति को भी कोयले की भाँति उपयोगी ऊर्जा में परिवर्तित कर राष्ट्र निर्माण हेतु नियोजित की जा सकेगी। हम देख रहे हैं कि हमारी परंपरा से विकसित सुसंस्कृति को भी नष्ट किया जा रहा है जिसका एक उदारण है कि लोग आजकल विदेशी कुते पालने में बहुत रूचि

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीीय युवुवा विकास घ्ंघ

ले रहें है और विदेशी कुता पालने की प्रवृति को समृद्धि का प्रतीक बना रहे हंै। प्रायः यह देखा जाता है कि शाम-सुबह कुत्ते को टहलाया जाता है और उन्हें विदेशी कविताएँ व लोरी भी सुनाया जाता है और वहीं दूसरी ओर देशी कुता जो जूठा खाकर जीवन भर फादार व ईमानदार रहता है उसका तिरस्कार किया जा रहा है। इसी कुसंस्कृति का परिणाम है कि घर के बुजुर्ग को निरादर किया जा रहा है। हम कल्पना कर सकते है कि जब वर्तमान भारत का 80 करोड़ युवा एक समय के बाद जब बुढ़ी हो जाएगी तब उसका क्या होगा? क्या हम बिना सुसंस्कृति के इतने जर्गो की संख्या को आदर और सम्मान के साथ स्वयं से जोड़ पाएँगे? प्रस्तुत परिस्थितियों से हमारा मानना है कि इस संस्कृति से बुजूर्ग का अनुभव और युवा शक्ति में कोई मेल नहीं है, तथा भविष्य में इस प्रकार की संस्कृति से स्थिति और भयावह होने की संभावना है। इस प्रकार बिना बुजूर्ग के अनुभव से हमारी युवा शक्ति असंतुलित होकर विध्वंस के कार्य में संलग्न हो जाएगी। इस संदर्भ में हमारा स्पष्ट विचार है कि यह हमारी समाज तथा सरकार की संयुक्त दायित्व हैं कि शुद्ध अन्तकरण से एक ठोस नीति बनाकर सम्मिलित प्रयास करना चाहिए जिससे कि एक सुसंस्कृति का निर्माण होगा जिससे इस विपुल मानव संपदा का सदुपयोग हो सकेगा। मानव संपदा के विकास के द्वारा ही भारत का वास्तविक विकास किया जा सकता है जिसमें सबसे अधिक महत्पूर्ण भूमिका युवाओं की होगी। हम युवा शक्ति और हमारे बुजगों के अनुभव को मिला कर प्रयास करें तो निश्चित ही एक मार्ग का जन्म होगा। उपरोक्त बातों को इन परिस्थियों से महसूस किया जा सकता है कि यदि हम भारत के विकास पर एक नजर डाले और 2011 ई0 की माजिक अर्थिक जनगणना का अध्ययन करें तो ज्ञात होता है कि स्वत्रंत भारत के 65 वर्ष गुजर जाने के बाद भी देश में मैला ढोने वाले के परिवारों की संख्या एक लाख पच्चास हजार से उपर है। यदि हम इसके सुक्ष्मता को देखे तो ज्ञात होता है कि देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में इसकी सबसे अधिक संख्या है। वर्तमान आधुनिक भारत में लाखो परिवार को एक वक्त का खाना नसीब नहीं हो रहा है। हजारो परिवार भुखमरी और कुपोषण के शिकार हैं। घर के बड़े बुजर्ग को निरादर कर घर से निकाला जा रहा है और वृद्ध इन कुसंस्कार के कारण एकांकी जीवन जीने के लिए मजबूर हो रहें हैं। गुजरात जैसे विकसित राज्य पर भी एक नजर डाले तो ज्ञात होता है की वह भी कुपोषण की अग्रणी राज्यों में से एक है। भारत के हजारों ग्रामीण परिवारों के होनहार बच्चें आज भी विद्यालय के चैखट तक पहुँच नहीं पा रहें हैं। वहीं दूसरी ओर अमीरों की संख्या में भारी वुद्वि हो रही है और 2023 ई0 तक अमीरों की संख्या में भारी वृद्धि का अनुमान है। नैतिक मूल्य नहीं होने के कारण देश के नेता, मंत्री, नौकरशाह की आर्थिक तरक्की गुणज में हो रही है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि हमारे गृह राज्य झारखण्ड में झारखण्ड लोक सेवा आयोग के द्वारा प्रतिभा का गला घोट कर अयोग्य लोगों की नियुक्ति की अनुशंसा की गई थी और वे अयोग्य लोग सीना तान कर हमारे भोले भाले जनता का शोषण और शासन कर रहें हैं। पिछली केन्द्रीय सरकार की कोयला घोटाला, स्पेक्ट्रम घोटाला एवं अन्य घोटाले भी देश के सामने एक बड़ा प्रमाण के रूप में उपलब्ध है। करोड़ो होनहार युवाओं के भविष्य के साथ नेता और नौकरशाह के महाजोड़ से प्रतिभा को दबाया जा रहा था। झारखण्ड राज्य निर्माण हुए 16 वर्ष गुजर गए लेकिन क्या जिन उद्देश्यों के लिए इस राज्य के निर्माण की गई थी उसका क्या एक हिस्सा भी प्राप्त हुआ है? इस विषय पर यदि आकलन करें तो ज्ञात होता है कि इस राज्य को भी लुट का सबसे बड़ा बाजार बना दिया गया था। एक आम आदमी बिना पैसा का एक दाखिल खारिज तक नहीं करा पा रहा था। प्रभावशाली लोग अपने पैसा और सत्ता के शक्ति के बदौलत आज जन सामान्य के अधिकार को दबाने का प्रयास कर रहें थें। इन्हीं सब परिस्थितियों के कारण राज्य में कानून का पालन मूल रूप में नहीं हो रहा था कानून व्यवस्था पर सरकार पिछड़ गई थी, आए दिन दिन दहाड़े हत्या चोरी डकैती इत्यादि घटनाएं

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घट रही थी, मामूली सी बात को लेकर लोग सड़क को घंटो जाम रख रहें थें। अपराधी अराम से घूम रहें थें और उन्हें पुलिस प्रशासन का कोई डर नहीं था। यदि हम इसके कारण में जाए और उसकी विववेचना करें तो रोंगटे खड़े हो जाएँगे और हम पर अपराधिक मानहानि का केस दर्ज हो जाता। इन घटनाओं की चर्चा का कारण है कि इसका सीधा संबंध युवाओं से है। भारत की युवा शक्ति बेकार ही नष्ट हो रही है और इसे बचाने के लिए हमारी सरकार को और अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। दुर्भाग्यवश हमारा समाज भी आँखें बंद कर रखी है तभी तो हमारी सरकार संवेदनशील नहीं है। इन सब के कारण हमारी युवा शक्ति अत्याधिक घातक रूप में प्रभावित है और सृजन के स्थान पर विध्वंस हो रहा है। सरकार की हजारों करोड़ रूपया और तंत्र इसे नियंत्रित करने में खपत हो रहा है और परिणाम कुछ भी नहीं निकल रहा है। इन्हीं अशांति के परिस्थितियों के कारण युवाओं से भरा भारत का अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। इससे देश के अन्दर कई प्रकार के समस्याओं का नित्य जन्म हो रहा है। समस्याओं का जन्म का श्रृंखला इसी तरह बढ़ता रहा तथा इसके समाधान के उपाय न निकाले गए तो एक दिन पूरी व्यवस्था ही चैपट
होने की पुरी संभावना है। युवाओं के प्रतिभा का सदुपयोग नहीं होने के कारण देश गरीबी भुखमरी और भ्रष्टाचार की ओर बढ़ता जा रहा है। आज भी लोग मैला ढोने के लिए मजबूर हंै, भूखमरी और कुपोषण है, बलात्कार जैसे विभत्स घटनाएँ भी हो रहे हैं। हमारे लिए हर्ष की बात है कि राज्य की वर्तमान सरकार इस ओर गंभीर है। श्री नरेन्द्र मोदी, मान्नीय प्रधानमंत्री एवं श्री रघुवर दास, मान्नीय मुख्यमंत्री सुधार हेतु सार्थक प्रयास कर रहें हैं जिसका अच्छा परिणाम दिखाई भी दे रहा है। हम अपने जीवन की क्रिया-कलाप पर विचार करें, तो हमारे सामने यह तथ्य उजागर होगा कि भविष्य का अंधकार और आशा मानव जीवन के दो मूल अवलम्बन हैं। हम यह नहीं जानते कि कल क्या होने वाला है, किन्तु कल तक जीवित रहने तथा मनोनुकूल आशा लेकर योजनाएँ बनाते रहते हैं। मनुष्य के समक्ष भविष्य का घटनाक्रम स्पष्ट हो जाए तो वह निश्चित होकर निष्क्रिय हो जाएगा। बाधाओं को दूर करते हुए निर्धारित लक्ष्य को पाने की कामना ही मानव जीवन की प्रेरणा है। समस्त विश्व के भूतकाल में जो परिवर्तन हुए है उसमें युवा शक्ति की महत्पूर्ण भूमिका रही है। पुनः हमें राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए युवाओं को प्रेरित करने की आवश्यकता है। युवा मस्तिष्क की शक्ति स्वाभाविक रूप से हमारे पास उपलब्ध है। इस ईश्वरीय मानव संपदा के सदुपयोग से भारत का ही नहीं वरन् विश्व के विकास की संभावनाएँ हैं। युवाओं को अपने पुरूषार्थ की शक्ति और राष्ट्र के विकास के सोच से प्रेरित होकर राष्ट्र के विकास के लिए अपना योगदान सुनिश्चित करने का संकल्प लेने का समय आ गया है। आइए हम सब मिल कर युवाओं की शक्ति का सदुपयोग करें।

हमारे चिंतन व विचार

भारत की विपुल युवा शक्ति को राष्ट्र के नवनिर्माण में सुनियोजित करने में हमारी समाज और सरकार सफल क्यों नहीं हो रहें हैं? ईश्वर ने हमें स्वभाविक रूप से विराट युवा शक्ति का स्वामी बनाया है, परन्तु हम दुर्भाग्यवश इस अपरिमित ऊर्जा व शक्ति को राष्ट्र और समाज के नवनिर्माण (कायाकल्प) में नियोजित करने में सफल नहीं हो रहें हैं, जिससे सृजन होने के स्थान पर विध्वंस होने का खतरा मंडरा रहा है।वर्तमान भारत के युवाओं के परिपेक्ष्य में सरकारी आंकड़ों के अध्य्यन से वास्तविक स्थिति का पता चलता है जिससे युवाओं की स्थिति को महसूस कर हृदय पीड़ा से भर जाता है। भारत के कुछ असामाजिक तत्व इस विशाल युवा शक्ति पर गिद्ध दृष्टि डाले हुए हैं। समाज व सरकार की अफलता के कारण ही उन भारत के असामाजिक तत्वों के द्वारा युवाओं के मस्तिष्क में नफरत, घृणा, अलगाव आदि का बीज बोया जा रहा है। इन्हीं कारणों से देश के कुछ स्थानों में इसका खतरनाक रूप दिखाई दे रहा है। झारखण्ड, उड़ीसा और छतीसगढ़ राज्य की नक्सल समस्या इसका एक उदाहरण है। भारत के अन्य राज्य में भी नक्सलवाद, आंतकवाद, जातिवाद, कट्टर पंथवाद, नशापान, भ्रष्टाचार, आपराधिक जैसी घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। यह समस्या देश के सभी हिस्सो में प्रतिदिन बढ़ती चली जा रही है। इसके दूरगामी परिणाम के कल्पना मात्र से हृदय विचलित हो जाता है। भारत के होनहार युवा एक दूसरे के जान का दुश्मन बन बैठे हैं और अपनी शक्ति को विध्वंस के कार्य में प्रयोग कर रहें हैं जिससे मानव समाज में भय और अशांति का वातावरण उत्पन्न हो रहा है। शांति व न्याय प्रदान करने वाली भारतीय न्याय व्यवस्था के अध्ययन से ज्ञात होता है कि भारत में लगभग करोडो़ केस न्यायालय में लंबित है। यहाँ तक कि उच्च न्ययालय और सर्वोच्च न्यायालय में भी हजारो केस लंबित है। इन लंबित मुकदमों में अधिकांश संख्या युवाओं की है और वे नामजद अभियुक्त भी हैं। युवाओं की इन परिस्थितियों को देखने से ही हृदय व मन को अपार दुःख होता है। भगवान महात्मा बुद्ध ने इन्हीं गंभीर परिस्थितियों को 2500 वर्ष पूर्व अनुभव कियें और इसके स्थायी निदान के लिए राजत्व का त्याग किया और ज्ञान के मार्ग की खोज की। इतिहास साक्षी है कि महात्मा बुद्ध ने अहिंसा और शांति के सिद्धांत के द्वारा सम्पूर्ण समाज को कई सदियों तक रक्तपात होने से बचाया। उन्होंने
जनसामान्य तथा राजाओं के हृदय को प्रेम, अहिंसा और वात्सल्य से भर दियें। महात्मा बुद्ध के प्रतिपादित शिक्षा का ही प्रभाव था कि महान सम्राट अशोक ने 2400 वर्ष पूर्व पशुओं के लिए चिकित्सालय का निर्माण कराया। पशुओं के चिकित्सालय वास्तव में मानव संवेदना की सर्वोच्च अवस्था है। हम सब को भी भगवान बुद्ध से प्रेरणा पाकर वर्तमान में उत्पन्न गंभीर समस्या का समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए और यह हम सब की जिम्मेवारी है। हम कल्पना कर सकते हैं कि यदि महात्मा बुद्ध का उस काल खण्ड में ज्ञान न होता तो मानव सामाज की क्या स्थिति होती ? इस गंभीर विषय को संवेदनशीलता के साथ समझने तथा समस्या के निदान करने की नितांत आवश्यकता है। (हमने अपने चिंतन में पाया कि समस्याओं स्थायी निदान के युवाओं के सामथ्र्य बल पर किया जा सकता है) इसके लिए हम सब को भारत के विशाल युवा शक्ति को प्रेम और बंधुत्व के पवित्र धागे से परस्पर जोड़ने का मन, वचन व कर्म से प्रयास करना चाहिए। प्रेम और बंधुत्व के द्वारा विशाल मानव समाज के बीच संवाद स्थापित करना होगा जिससे
व्यापक स्तर पर ज्ञान का आदान प्रदान होगा, हमारी सोच को विस्तार मिलेगा और शुद्ध सोच ही वह रास्ता है जिससे परस्पर जुड़ाव संभव है। हमारा विश्वास है कि हम सच्चे मन और सामूहिक प्रयास की शक्ति से युवाओं को परस्पर जोड़ने में सफल होंगे क्योंकि यह हमारी आवश्यकता से जुड़ी है।

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भी पाते हैं कि भारत का एक युवा वर्ग अपने ज्ञान व पुरूषार्थ के बल पर कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट व प्रेरणादायक
प्रदर्शन कर रहें हंै विशेष रूप से आई. टी. (प्दवितउंजपवद ज्मबीदवसवहल) के क्षेत्र में नित्य नये कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं इसके अलावे भी अन्य क्षेत्रों में प्रेरक प्रदर्शन हो रहे हैं। युवाओं के प्रयास और पराक्रम से देश के विकास को गति मिला है और देश आगे बढ़ रहा हैं। इससे देश में सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं विज्ञान के क्षेत्रों में नई चेतना जागृत हुई है। भारत का मंगल विजय को इसका एक उत्तम उदाहरण है के रूप में देखा जा सकता है। इस विजय ने सम्पूर्ण विश्व का ध्यान हमारी ओर आकृष्ट किया है। युवाओं को प्रत्येक स्तर पर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है जिससे व्यापक स्तर पर इनकी भागीदारी बढ़ सकेगी। इस सीमित क्षेत्र के सफलता से प्रेरणा पाकर बड़ी सफलता के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने की
आवश्यकता है, क्योंकि भारत की विशाल आबादी आज अनेक गंभीर समस्याओं से घिरी है और इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं हो रहा है जिससे गंभीर समस्याओं का स्थायी निदान हो सकेगा। हमारी सरकार व समाज को बड़ी जिम्मेवारी लेने की आवश्यकता है क्योंकि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयास के द्वारा ही युवाओं को परस्पर जोड़ा जा सकता है। इस जुड़ाव के द्वारा युवाओं के मस्तिष्क में प्रेम व ज्ञान तथा हाथ को काम दिया जा सकता है जो युवाओं की सर्वोच आवश्यकता है जहाँ युवाओं को अपने प्रतिभा का प्रदर्शन का बड़ा अवसर प्राप्त होगा। इस प्रकार के सफलता से भारत के प्रत्येक क्षेत्र में समृद्धि आने की पूर्ण संभावनाएँ हैं और समृद्धि से ही समस्याओं का स्थायी निदान होगा। यदि हम प्रत्येक स्तर पर युवाओं को नेतृत्व देने में सफल होते हैं तो भारत पुनः विश्व का सर्वोच्च सत्ता व शक्ति के रूप में स्थापित हेागा। ऐसे जनहित के बड़े संभावनाएँ होने के बाद भी हम अपने युवा शक्ति का सदुपयोग करने में सामूहिक रूप से असफल रहें हैं। इसी का परिणाम है कि आशाओं का प्रतीक युवा आज हताशा, निराशा के अंधेरे में खोता
जा रहा है। इस स्थिति के लिए हमारी सरकारें तथा हमारा समाज संयुक्त रूप से पूर्ण जिम्मेवार है। आत्मबोध की एक मात्र माध्यम हमारी शिक्षा व्यवस्था है जो प्रेम व ज्ञान का मुख्य स्रोत है। यदि हमारी शिक्षा नीति पर एक नजर डालें तो ज्ञात होता है कि मैकाले की प्राचीन शिक्षा नीति पर आज भी चल रही है। सरकारी स्कूलों के अध्य्यन से पता चलता है कि शिक्षा की स्थिति अत्यंत ही खराब है, जिसका प्रभाव भारत की आम जनता व समाज पर सीधा पड़ रहा है। इसी का प्रभाव है कि शिक्षा व्यवस्था ज्ञानार्जन और जीविका उपार्जन में असफल रहा है। युवाओं की शक्ति को परस्पर जोड़ने उनके मस्तिष्क तक प्रेम व ज्ञान का पहुँच बनाने तथा उनकी अपार उपयोगिता को प्रस्तुत करने में हमारा शिक्षा व्यवस्था असफल रहा है। यह एक बड़ा कारण है कि भारत के एक सीमित युवा वर्ग ही देश में प्रेरणादायक प्रदर्शन कर रहें हैं और वह उदाहरण अपवाद स्वरूप हैं, इस अपर्याप्त सफलता पर गर्व नहीं किया जा सकता है। इस संदर्भ में प्रायः हम देखते हैं कि हमारा युवा विश्वविद्यालय से कागज की एक डिग्री हाथ में भविष्य का सपना लेकर निकलते हैं जिसमें उनके माता-पिता एवं समाज का भी सपना छिपा होता है। इस दिशाहीन शिक्षानीति के कारण कागज का वह उपाधि (डिग्रीे) उन्हें शिक्षित बेरोजगारी की दुनिया में सदस्यता प्रदान करता है और यहाँ से ही समस्या का जन्म होता है। इस संदर्भ में हम जब आज के बेरोजगारी की समस्या की गणना करते हैं तो ज्ञात हेाता है कि शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 25 करोड़ से अधिक है। यहाँ तक डाक्टर, अभियंता, वकील, इत्यादि वर्गों में भी बेरोजगारी है। यह समस्या प्रतिदिन घातक होती जा रही है। भारतीय बाजार में विदेशी घुसपैठ से भी रोजगार छिने जा रहें है। वैश्वीक-करण के इस दौर में अपना रोजगार बनाये रखने के लिए भारतीय शिक्षा व्यवस्था एक बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही है। हमारी शिक्षा नीति एकांकी लाभ के इर्द गिर्द घूम रही
है, जिससे गिनती भर युवाओं में कार्य का अत्याधिक बोझ है और युवाओं की बड़ी आबादी के पास कोई

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काम ही नहीं है, उनकी शक्ति, सामथ्र्य की कोई उपयोगिता नहीं है इससे युवा वर्तमान में आत्मविश्वास से
अपाहिज होता जा रहा है और वे कुण्ठा, निराशा और हीनता के शिकार हो रहें हैं जिसके कारण भी वे असमाजिक दुनिया में पलायन कर रहें हैं। वास्तव में हम युवा शक्ति को नियोजित करने में असफल रहें हैं। इस संदर्भ में अपराध के घटनाओं के अध्ययन से ज्ञात होता है कि युवाओं की एक बड़ी आबादी चोरी,डकैती, हत्या, ठगी, बलात्कार, जैसे अपराधिक दुनिया में सीधे संलिप्त है, क्योंकि युवा के मस्तिष्क तक ज्ञान व कत्र्तव्य का पहुँच नहीं है और इसके अभाव में हृदय व मस्तिष्क संवेदना रहित हो रहा है जिससे वे नियंत्रणहीन एवं दिशाहीन हंै। इसका साक्षात प्रमाण है कि देश में लाखों माताओं, बहनों व बेटियों का वीभत्स रूप से बलात्कार किया जा रहा है और इस वीभत्स घटना को नियंत्रण करने में हमारी सरकार, प्रशासन और समाज असफल रहें है। दिल्ली का निर्भया कांड इसका एक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है। इस घटना के बाद सरकार ने सख्त कानून बनाया लेकिन आंकड़ा स्पष्ट संकेत करता है कि बलात्कार की घटना में वृद्धि हो रही है। स्पष्ट है कि ऐसे घटनाओं का नियंत्रण सख्त कानून से नहीं हो सकता है। ऐसे वीभत्स घटना पर स्थायी नियंत्रण के लिए सुसंस्कार व ज्ञान की आवश्यकता है। इन कुकृत्यों का अंत यहीं नहीं हो रहा है वरन् श्रृखंला बना रही है। यदि आत्महत्या जैसे विभत्स घटना पर भी अध्ययन करें तो पता चलता है कि प्रत्येक एक मिनट में आत्महत्या का प्रयास और सांतवे मिनट में आत्महत्या हो रहा है। देश का किसान भी व्यवस्था से निराश होकर नित्य आत्महत्या कर रहें हैं, आंकड़ो पर ध्यान दें तो पता चलता है कि प्रत्येक दिन 43-45 किसान औसतन आत्महत्या कर रहें हैं। सन् 1995 ई0 से मार्च 2015 ई0 तक में किसान के द्वारा किये गए आत्महत्या की गणना करते हैं तो ज्ञात होता है कि 3 लाख 30 हजार किसान आत्महत्या कर चूके हैं। घरेलु महिलाएँ भी परेशान होकर आत्महत्या कर रही हैं। जीवन का त्याग करना
मानव के लिए अंतिम रास्ता होता है और यह भारत जैसे ज्ञानरूपी सूर्य के देश में नित्य हो रहा है। हम कहाँ और किस ओर जा रहें हैं ? इसका उत्तर हम सभी मानव समाज को अपना कत्र्तव्य समझ कर खोजना होगा तभी उपरोक्त समस्याओं का स्थायी समाधान खोजा जा सकेगा जो राष्ट्र और सभ्य सामाज के लिए अति आवश्यक है। हमारी सरकार को इस ओर विशेष ध्यान देते हुए व्यापक स्वरूप में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति बना कर लागू करने की आवश्यकता है। इस संवेदनशील विषय में मान्नीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा सृजित ‘‘मेक इन इण्डिया, कौशल विकास, स्वच्छ भारत, डिजिटल इण्डिया, आदर्श ग्राम योजना आदि’’ योजनाओं की रचना बहुत ही सार्थक व उपयोगी प्रयास है। हमारा अनुभव कहता है कि बेरोजगारी जैसे अत्यंत गंभीर बीमारी की चिकित्सा इन उपायों के द्वारा किया जा सकता है साथ ही युवाओं के ऊर्जा के द्वारा निर्धारित लक्ष्य को भी ससमय प्राप्त किया जा सकता है। भारत के विराट युवा शक्ति को इस प्रकार के सही व शुद्ध सोच के द्वारा ही परस्पर जोड़ा जा सकता है और हम सब को इसके लिए सच्चे मन से प्रयास करना चाहिए। इतनी बड़ी युवा शक्ति का देश होना गौरव और सौभाग्य है। इस युवा शक्ति की अपरिमित क्षमता समस्त समस्याओं का निदान करने में पूर्ण सामथ्र्य है। ध्यान रखना होगा कि यह सिर्फ दिखावा न हा,े और कागज में ही सिमट के रह न जाए। प्रायः ऐसा होता है कि एक सरकार गई दूसरी आई और सब समाप्त हो गई। इन सबसे अन्ततः देश और समाज पिछड़ता है। देश का हजारों करोड़ रुपया नष्ट हो जाता है। अतः हमारी सरकार व समाज से निवेदन है कि इस संवेदनशील विषय पर समग्र रूप से चिंतन व विचार करें तथा प्रयास भी करें जिससे युवाओं की शक्ति का उपयोग देश व समाज के नवनिर्माण में हो सकेगा जो हम सब की मूल आवश्यकता है।

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आइडिया हमने चिंतन व विचार के द्वारा एक रास्ता आइडिया की खोज के प्रयास कियें हैं जिससे कि युवाओं के अपरिमित ऊर्जा, उत्साह, साहस, शक्ति के बल को समृद्ध भारत के निर्माण में नियोजित की जा सकेगी। हमारे चिंतन में एक आइडिया व रास्ता का सृजन राष्ट्रीय स्तर के प्रतिवद्ध युवा संगठन निर्माण के रूप में हुआ है। जिसका स्वरूप प्रजात्रांत्रिक मूल्यों के साथ सामाजिक व सांस्कृतिक एवं धर्मनिरपेक्ष
सिद्धांतों पर आधारित है। जिससे कि व्यापक स्तर पर सम्पूर्ण भारत के युवाओं को परस्पर जोड़ा जा सकेगा। इस प्रक्रिया में ज्ञान का आदान-प्रदान होगा जिससे सृजनात्मक और रचनात्मक गुणों का विकास भी होगा और युवा मष्तिस्क का सोच विकसित होगा। युवाओं के विकसित मष्तिस्क में प्रेम और बंधुत्व का पवित्र सोच को डोर (धागा) बना कर सम्पूर्ण भारत के युवाओं को जोड़ सकते हैं। हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होते हैं तो निश्चित ही एक महान क्रांति होगी जहाँ परिवर्तन होगा, गंभीर समस्याओं का निदान होगा। भारत की युवा शक्ति की आवाज सम्पूर्ण विश्व को सुनाई देगी। इस प्रकार के सफलता के द्वारा ही हम युवा मस्तिष्क में प्रेम व ज्ञान प्रवाहित कर सकेंगे तथा प्रत्येक हाथ को काम देकर युवा शक्ति को राष्ट्र के नवनिर्माण में नियोजित कर सकेंगे। हम सभी भारतवासी को ऐसा प्रयास करना चाहिए जिससे हमारी स्वाभाविक अपरिमित ऊर्जा, उत्साह, साहस, शक्ति को राष्ट्र वो समाज के निर्माण के काम में लगा सकने में सफल होंगे तब ही हमारा राष्ट्र और सामाज का कायाकल्प, नवनिर्माण होगा जो सम्पूर्ण विश्व के लिए भी एक सुन्दर, सरल नूतन मार्ग होगा। तात्पर्य है कि युवाओं के अपरिमित ऊर्जा, अदम्य साहस, शक्ति के द्वारा भारत में व्याप्त गंभीर विविध समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकेंगे। हमारा विश्वास है कि हमारे चिंतन से सृजित आइडिया के द्वारा समृद्ध भारत बना सकते हैं।
मा. मंत्री ग्रामीण विकास श्री नीलकण्ठ सिंह मुण्डा एवं नरेन्द्र कुमार।
मुखिया साधो उराँव, बबलू राम एवं विरेद्र उराँव जी।

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीीय युवुवा विकास संघ्ंघ

संकल्प समृ़द्ध भारत के निर्माण लिए हमने संकल्प किया है कि देश के युवाओं को परस्पर प्रेम और बंधुत्व से एवं एक दूसरे के पूरक आवश्यकता को डोर बनाकर जोडे़ंगे तथा उनके अपरिमित ऊर्जा को देश के नवनिर्माण में नियोजित करने के लिए प्रेरित करेंगे। इस हेतु युवाओं पर विस्तार से अध्ययन कियें हैं जिससे ज्ञात हुआ कि आजादी के बाद भारत में व्यापक स्तर का एक सशक्त व प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित नहीं हो पाया है, जो भारत के युवाओं का मार्ग दर्शन करें उन्हें परस्पर जोड़कर उनके हाथ में काम दें, उन्हें उनके कत्र्तव्य का बोध कराए तथा विकास की ओर दिशा दिखाए साथ ही हम सब की पूरक आवश्यकता को भी बतलाए तथा उन्हें नेतृत्व प्रदान करें। आज के सूचना तकनीक के इस युग में भी हम युवाओं का एक सशक्त संगठन बनाने और उन्हें नेतृत्व देने व करने में सफल नहीं हुए हैं। स्पष्ट है कि ऐसे सशक्त संगठन के अभाव में 21 वीं सदी का युवा हताश, निराश, असंतुष्ट और परेशान होता जा रहा है क्योंकि हमारी समाज व सरकार उन्हें राह दिखाने में असफल हैं। वास्तव में यह युवाओं का स्वाभाविक अपरिमित ऊर्जा का राष्ट्रीय क्षति है जहाँ युवाओं की ऊर्जा बिना किसी उपयोगी परिणाम के ही नष्ट हो रहा है। इसे रोकना हम सब का कत्र्तव्य है और हमें इस दिशा में ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में इजराइल और जापान के अध्ययन कर हम पाते हैं कि वहाँ की सरकार और समाज ने युवा शक्ति का भरपूर उपयोग अपने राष्ट्र निर्माण के लिए किया जिसका परिणाम हुआ कि दोनों ही राष्ट्र ने अपने युवा उद्यम और साहस के बल पर देश को समृद्ध बनाने में सफल हुए, जहाँ से हमें प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। भारत में व्याप्त कई गंभीर समस्या जैसे नक्सलवाद, क्षेत्रवाद, जातिवाद, आंतकवाद, भ्रष्टााचार, कट्टर पंथवाद, इत्यादि का समुचित निदान युवा शक्ति के बल पर किया जा सकता है। इन समस्याओं के अस्तित्व का आधार भी युवा शक्ति की संकीर्ण सोच की दीवार है। संकीर्ण सोच ने इस शक्ति का विभाजन कर दीवार खड़ा कर दिया है और यह दीवार ही समस्याओं का जन्म का कारण है। इस विशाल दीवार को शुद्ध व पवित्र सोच से सेतु बनाया जा सकता है । हम अपने शुद्ध सोच की धागा से सम्पूर्ण भारत के समाज को एक सूत्र में जोड़ सकते है जहाँ प्रेम, भाईचारा, सद्भावना, बंधुत्व आदि का जन्म हेागा। तात्पर्य है कि नफरत और
घृणा की दीवार को प्रेम और बंघुत्व से ही सेतु बनाया जा सकता है। भारत के महान चिंतको व विद्वानों का मत है कि ‘‘सेतु का अर्थ जोड़ना है और जोड़ना सभी समस्याओं का स्थायी हल है’’। हजरत मोहम्मद साहब जी ने अरब के बिखरे समाज को एक सूत्र जोड़ कर अनेक गंभीर समस्याओं का स्थायी रूप से निदान कियें। हमें भी उनसे शिक्षा प्राप्त कर इस युवा शक्ति को प्रेम और बंधुत्व का ज्ञान देकर परस्पर जोड़ने का सार्थक प्रयास करना चाहिए जिससे कि एक समृद्ध भारत की सोच वास्तविक आकार ले लेगी। हमारा कार्यानुभव है कि सही सोच में स्थायित्व के साथ पुरूषार्थ करने से निश्चित सफलता मिलती है। अतः युवाओं, समाज, सरकार एवं अन्य सभी को स्वामी विवेकानन्द जी से प्रेरणा पाकर ऐतिहासिक परिवर्तन के इस दौर में भारत के नवनिर्माण हेतु राष्ट्रीय स्तर के प्रतिवद्ध युवा संगठन निर्माण का संकल्प करना चाहिए जो हमारी आवश्यकता है, इसमें सृजन की असीम संभावनाएँ हैं । हस सब अपने पुरूषार्थ के द्वारा जड़ता, संकीर्णता, स्वार्थ, अहंकार, इत्यादि को त्याग कर एक सशक्त समृद्ध, सपनों का भारत के निर्माण हेतु आगे आना चाहिए। भारत हमारी माँ है और माँ हम सब को पुकार रही है कि उठो जागो, अपने पुरूषार्थ के शक्ति को पहचानो, और सपनों का समृद्ध भारत का निर्माण

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करो। भारत विश्व का ज्ञानरूपी सूर्य है इस गौरव को पुनः स्थापित करो। भगवान श्री कृष्ण कुरूक्षेत्र के रण मैदान में अर्जुन से कहा‘‘ हे पार्थ मृत्यु को पाकर स्वर्ग प्राप्त करने से अच्छा कि इस धरती को अपने पुरूषार्थ से जीत लो और अपने सुकर्म से समस्त धरती को स्वर्ग बना दो, पार्थ उठो, ध्ारती माँ तुम्हारी प्रतीक्षा कर रही है। आज पुनः भारत माता हमें पुकार रही है कि समय आ गया है उठो,जागो अपने शौर्य को पहचानों, गौरवमयी इतिहास हमारा मार्गदर्शन करेगी। हमें विश्वास है कि देश में एक प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित होगा जिसमें देश के सभी नागरिक स्वयं की भागीदारी सुनिश्चित करेंगे जिससे ही भारत के युवा शक्ति को परस्पर जोड़ने से सफलता मिलेगी। इस जुड़ाव के द्वारा ही युवाओं
को उनके दायित्व को भी सौंपा जाएगा। इसी विश्वास ने हमें शक्ति दी और संकल्प किये कि प्रतिबद्ध युवा संगठन, के रूप में ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ को राष्ट्रीय स्तर में विकसित करेंगे। ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ का जन्म हमारे चिंतन के द्वारा आइडिया के रूप में हुआ है। यह संगठन हमारे सपनों का समृद्ध भारत का निर्माण के लिए कार्य करेगी।निःशुल्क चिकित्सा शिविर मा0 विधायक श्रीमान् रामकुमार पाहन द्वारा महोत्सव में लगे
स्टोल्स को देखते हुए।राँची के सांसद, साथ में शाखा प्रबंघक डाॅ. जी. पी. सिंह,सुबोध कुमार एवं सुदेश उराँव।मा0 मंत्री श्रीमान् अमर कुमार बाउरी एवं मा0 सांसद श्रीमान्रा मटहल चैधरी द्वारा महोत्सव को निहारते हुए

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राष्ट्रीय युवा विकास संघ की भूमिका

हमारे चिंतन और विचार के द्वारा आइडिया व रास्ता के रूप में ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ नामक युवा संगठन का सृजन व जन्म हुआ है। इस संगठन का मूल उद्देश्य है कि भारत के 80 करोड़ युवा मस्तिष्क तक प्रेम व ज्ञान और उनके 160 करोड शक्तिशाली हाथों को काम देना है। युवाओं को परस्पर प्रेम और बंघुत्व का सेतु बनाकर जोड़ना और इस जोड़ से हम भारत के प्रत्येक घर तक अपने शुद्ध सोच व विचार को पहुँचाने में सफल होंगे। इतिहास साक्षी है कि शुद्ध विचारों कि शक्ति से स्वामी विवेकानन्द जी ने लाखों युवाओं तक अपनी पहँुच बनाई है। हमारी सफलता में भारत में व्याप्त कई गंभीर समस्याओं का स्थायी हल का उपाय है जो हम सब के लिए आवश्यक है और यह सपनों का समृद्ध भारत के लिए भी एक सरल रास्ता होगा। हमने संकल्प किया है कि भारत के इस विशाल युवा शक्ति को एक धूरी में शुद्ध सोच के द्वारा संगठित करेंगे और इसके लिए राष्ट्रीय स्तर का युवा संगठन निर्माण करने की आवश्यकता है। हम सब जानते हैं कि प्रेम, विश्वास, भाईचारा और सद्भावना के पवित्र सोच से सम्पूर्ण विश्व के मानव समाज को जोड़ा जा सकता है। प्रभु ईसा मसीह ने सम्पूर्ण यूरोप के सामाज को प्रेम से जोड़ा है और उनके पवित्र सूत्र प्रेम ने विश्व के मानव समाज को परस्पर एक दूसरे के साथ जोड़ा है। जब हम परस्पर एक दूसरे से प्रेम और भाईचारा के शुद्ध सोच से जुड जाएँगे तब ही हमाारे बीच नफरत और घृणा का दीवार सेतु में परिवर्तित हो जाएगा और इस परस्पर जुड़ाव एवं पूरक आवश्यकता के द्वारा ही हमारे बीच उपस्थित गंभीर समस्याओं का स्थायी हल हो सकेगा। अतः अपने संकल्प के प्राप्ति हेतु एक सशक्त व प्रतिबद्ध युवा संगठन ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’ का निर्माण प्रजातांत्रिक सिद्धांत के अनुरूप किया और यह भारत के विशाल युवा शक्ति को परस्पर प्रेम और बंधुत्व से जोड़ने के लिए आइडिया व रास्ता है। इस संगठन को सशक्त और व्यापक स्वरूप प्रदान करने हेतु इसे संवैधानिक रूप प्रदान किया गया जो सबों को एक सूत्र में जोड़ने का काम करेगा। संवैधानिक स्वरूप के अनुरूप संघ सुक्ष्म स्तर पर सन् 2010 ई में 10 शिक्षित युवाओं का समूह बनाकर राष्ट्रहित के लिए कार्य प्रारंभ किया, जिसमें समाज के सभी वर्गो का सहयोग प्राप्त हो रहा है। जनसमर्थन से संघ सशक्त और सामथ्र्य बन रहा है। इस सहयोग के द्वारा सद्भाव पूर्ण वातावरण में कई गंभीर समस्याओं का समाधान संभव हुआ है। छोटी सफलता ने हमारे उत्साह और संकल्प को पोषण प्रदान किया। सबों के सहयोग के बल पर संघ सात वर्षों से अपने क्षमता व योग्यता के अनुसार निर्धारित उद्देश्य की प्राप्ति हेतु धरातल पर काम कर रही है। संघ के कार्य और संकल्प को संक्षिप्त में प्रस्तुत कर रहें हैं कि युवा ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ से प्रेरित होकर सपनों के समृद्ध भारत के निर्माण के लिए अपना योगदान सुनिश्चित करेंगे। आ रहे समय में हम आइडिया के अनुरूप सम्पूर्ण देश में राज्य से जिला से प्रखण्ड से पंचायत से गांव तथा निगम से वार्ड, से मुहल्ला तक संगठन का विस्तार युवाओं को परस्पर जोड़कर तथा सबों के सहयोग से संघ को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने हेतु प्रयासरत हैं। हम भारत सरकार व सभी राज्य सरकार से निवेदन करते हैं कि ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ को राष्ट्रीय स्तर का प्रतिबद्ध युवा संगठन के रूप में विकसित करने में हमारी मदद करें। यह पूर्ण सत्य है कि सरकार और जन समर्थन के द्वारा ही राष्ट्रीय स्तर का युवा संगठन विकसित किया जा सकता है। हम अपने अनुभव से कह सकते हैं कि युवा संगठन के द्वारा भारत के युवाओं को बंघुत्व के डोर से जोड़ सकते है। इस सफलता से भारत में व्याप्त विविध गंभीर और जटील समस्याओं का समाधान सद्भावना पूर्ण वातावरण में हो सकेगा साथ ही युवाओं के अपरिमित ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा जहाँ सपनों का समृद्ध भारत की सोच आकार लेगी। इसी संकल्प से सिद्धि तक की यात्रा में राष्ट्रीय युवा विकास संघ केन्द्रीय भुमिका में उपस्थित होगी।

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अभियान

प्रथम ;पितेजद्ध विविध भारत के विविध गंभीर समस्याओं का स्थायी निदान कैसे हो ? समस्याओं का मूल कारण क्या है ? हमरी स्वाभाविक विराट युवा शक्ति का सदुपयोग राष्ट्र के निर्माण में कैसे हो ? सपनो का समृ़द्ध भारत का निर्माण का रास्ता क्या है ? इत्यादि विषयों पर कई वर्षों के अनवरत चिंतन व विचार के उपरांत आइडिया, रास्ता का सृजन व जन्म हुआ जिसके परिणामस्वरूप झारखण्ड राज्य के राँची जिले में ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ‘‘ नामक युवा संगठन उदय हुआ । 12 जनवरी 2010 ई0 (युवा दिवस व स्वामी विवेकानन्द जयन्ती)
में शिक्षित युवाओं का एक सूक्ष्म संगठन का निर्माण कर प्रतिबद्ध युवा संगठन की नींव रखी गई। राष्ट्रीय युवा विकास संघ अपने स्थापना काल से ही युवाओं के विकास, उनकी समस्याओं का समाधान और समृद्ध भारत के उद्देश्य के लिए कार्य करना प्रारंभ किया। सर्व प्रथम संघ ने युवाओं से संबंधित समस्याओं का सूची बनाया, और समस्याओं को वैज्ञानिक तरीकों से जाना और समाधान के लिए प्रयास शुरू किये। इस प्रयास में अनेक लोग प्रत्यक्ष रूप से लाभार्थी बनने लगे हैं जिससे संगठन प्रति लोगों का विश्वास भी बढ़ रहा है। हमारी सर्वजन हिताय व सर्व जन सुखाय राष्ट्रीय सोच व कार्य ने लोगों को प्रभावित किया जिससे संघ की विश्वश्नियता लोगों के बीच बढ़ने लगी है। हमारी सोच व कार्य से लोगों का विशेष रूप से युवक और युवतियों का जुड़ाव हो रहा है। संघ ने युवाओं से संबंधित समस्याओं का अध्य्यन किया और पाया कि युवाओं में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या
के कारण अन्य समस्याओं को जन्म हो रहा है जिसके कारण अशांति और अव्यस्था का वातावरण समाज में बनता है। यह भी एक सत्य है कि सभी को सरकारी सेवा में नियोजित करना किसी भी सरकार के लिए असंभव है। इसके वैकल्पित मार्ग की व्यवस्था करने की आवश्यकता है। बेरोजगारी जैसे गंभीर समस्या का समाधान हेतु युवाओं को विशेष रूप से स्वरोजगार की ओर ध्यान देने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। हमारा मत है कि स्वरोजगार से बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्या को नियंत्रण किया जा सकता है। स्वरोजगार से भारी संख्या में रोजगार सृजन किये जा सकते है। इस प्रक्रिया में भारत का विशाल मानव श्रम का उपयोग निर्माण के क्षेत्र में होगा जिससे अर्थिक, समाजिक समृद्धि आएगी। वर्तमान प्रधानमंत्री श्रीमान् नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी का मेक इन इण्डिया भी सफल हो सकता है। अतः राष्ट्रीय युवा विकास संघ के द्वारा स्वरोजगार से संबंधित युवाओं को कई प्रकार की जानकारी उपलब्ध करायी जा रही है। योग्य और प्रतिभावान युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुरूप प्रेरित कर उन्हें सरकारी सेवा की ओर भी उन्मुख किया जा रहा है, जिससे जिसके अच्छे परिणाम मिलें हैं। इसके साथ ही समाज सेवा में मन लगाने वाले युवाओं को जोड़कर सामाजिक कार्य में जोड़ने का काम हो रहा है।
इस प्रयास में भी हमें उत्साह वर्धक परिणाम मिलें हैं। वर्तमान में इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए सरकार के कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए राज्य निवर्तमान मा0 मुख्यमंत्री श्रीमान् अर्जुन मुण्डा एवं मा0 सांसद श्रीमान् रा0 ट0 चैधरी जी

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महत्वाकांक्षी योजनाओं ‘‘कौशल विकास, स्वच्छता अभियान, डिजिटल इण्डिया, मेक इन इण्डिया, प्रधानमंत्री
जनधन योजना, रोजगार, भ्रष्टाचार, रोकथाम, इत्यादि महत्वपूर्ण सरकारी योजना को धरातल पर उताराने और अधिक से अधिक जन समान्य को लाभार्थी बनाने में अपनी योगदान दे रहें हैं। इन सब कार्यों से अनुभव प्राप्त करते हुए हम निरंतर आगे बढ़ रहें हैं जहाँ समाज के सभी वर्गो का सहयोग प्राप्त हो रहा है। संघ अपने प्रयास से कई युवाओं कीे समस्या का निदान किया है, आगे हम व्यापक स्तर पर युवाओं के विषय मंे काम करने के लिए संकल्पित है। इस प्रकार के कार्य से युवाओं में विश्वास का वातावरण का निर्माण हो रहा है। हमारा प्रयास और कार्य का जिसके साक्षी आमजन, युवा, अधिकारी, नेता सभी लोग हैं। इस कड़ी को पूरी उत्साह के साथ आगे बढ़ा रहें हैं तथा हर अगले प्रयास में और अधिक ऊर्जा का उपयोग हो रहा है जिससे हम कई समस्याओं का समाधान करने में सफल हो रहें हैं। हमारी सफलता हमें लक्ष्य की ओर ले जा रही है। द्वितीय ;ैमबवदकद्ध राष्ट्रीय युवा विकास के तत्वावधान में 12 जनवरी 2012 ई0 में युवा महोत्सव आयोजित कर हजारों युवाओं को एक मंच पर आमंत्रित किया गया। उन्हें उनके कत्र्तव्यों से अवगत कराया गया। युवाओं में विद्यमान अपरिमित ऊर्जा को बताया गया साथ ही उसके उपयोग से युवाओं में आने वाले प्रमुख परिवर्तन को बतलाया गया। युवा कैसे स्वयं तथा समाज व राष्ट्र नवनिर्माण, कायाकल्प करने में साम्रथ्र्य है, इसे विस्तार से उनके बीच प्रस्तुत किया गया है। इस प्रयास के बहुत ही उत्साह जनक परिणाम आये है, हमारे कार्य को हजारों लोगों ने खुले मन से सराहा, स्वीकार किये साथ ही प्रत्यक्ष रूप
से मदद भी की है। हमारा अनुभव कहता है यदि राष्ट्रीय स्तर पर गुजरात के ‘‘गुजरात बाई ब्रेंड’’ तर्ज पर युवाओं के लिए कार्यक्रम हो जिसमें देश के युवाओं को उनके योग्यता व प्रतिभा प्रदर्शन के लिए आमंत्रित की जाए। उनकी प्रतिभा को समझा और परखा जाए तथा उनके प्रतिभा को पहचान कर अवसर व उचित दिशा भी प्रदान की जाए। ऐसा होने पर हम अपने कह सकते हैं कि अपेक्षित एवं दूरगामी परिणाम प्राप्त होंगे। हमारे द्वारा सन् 2012 ई0 के 12 जनवरी युवा दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन किया गया जहाँ युवाओं को अपना प्रतिभा व योग्यता का प्रर्दशन का अवसर प्रदान किया गया। युवाओं ने इस अवसर का भरपूर लाभ प्राप्त किया। युवाओं ने अपनी प्रतिभा और योग्यता को प्रस्तुत की जिससे उनमें विद्यमान प्रतिभा का पहचान हुआ और उन्हे उनके प्रतिभा और योग्यता के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया। इस कार्य को सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में संसाधान के अभाव के बाद भी युवाओं के ऊर्जा के द्वारा आयोजन सफल किया। युवाओं ने विभिन्न प्रकार से जन कल्याण के कार्य में भी
हिस्सा लिया और अपने ऊर्जा से लोगों को कई प्रकार से मदद की। इस प्रकार के प्रयास से हजारों जन सामान्य को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ। हमारी सोच सफल हुई जिससे हम सब में ऊर्जा का संचार हुआ और पूरे वर्ष सक्रिय रहें। हमने सक्रियता और उत्साह से तीसरे युवा महोत्सव की तैयारी प्रारंभ किये। तीसरा युवा महोत्सव और अधिक भव्यता तथा व्यापक जनसमर्थन के साथ सम्पन्न किये जिसके साक्षी राज्य के तात्कालिक मुख्यमंत्री श्रीमान् अर्जुन मुण्डा और सांसद श्रीमान् रामटहल चैधरी तथा आमजन बनें। हमारी सफलता ने सपनों का समृद्ध भारत के लिए पोषण प्रदान कर रहा है और हम अपने लक्ष्य की ओर निरतंर आगे बढ़ रहें हैं।

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तृतीय ;ज्ीपतकद्ध

नये उमंग के साथ राष्ट्रीय युवा विकास के तत्वावधान में 12 जनवरी 2013 ई0 युवा दिवस के अवसर
पर ंतृतीय युवा महोत्सव आयोजित की गई जिसमें भी हजारों युवाओं को एक मंच पर आमंत्रित किये गये। युवाओं ने अपनी उपयोगिता और शक्ति को बतलाया गया। हमारे लिए संयोग ही था कि राज्य के तात्कालिक मुख्यमंत्री श्रीमान अर्जुन मुण्डा ने 2013 के वर्ष को युवा वर्ष के रूप में घोषित किये थे। हमारा सौभग्य था कि वे हमारे बीच मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान हुए। उन्होने अपने ओजपूर्ण उद्बोधन के द्वारा युवाओं को ऊर्जा से भर दिया। मान्नीय मुख्यमंत्री ने हमारी ऊर्जा को गति प्रदान की। उन्होने कई घोषणाएँ की परन्तु दुर्भाग्य से उनकी सरकार गिर गई। श्रीमान् अर्जुन मुण्डा जी और हमारे लोकप्रिय सांसद अभिभावक श्रीमान् रामटहल चैधरी जी ने हमारे प्रयास का पूर्ण समर्थन किया और कर रहे हैं। उनका समर्थन से हमारे ऊर्जा
का और अधिक गति से संचार हुआ और हम विभिन्न प्रकार से जन कल्याण का कार्य युवाओं के ऊर्जा के द्वारा कर रहें हैं साथ ही युवाओं के समस्याओं का निदान करने का प्रयास कर रहें हैं। हमारे प्रयास से जन सामान्य और युवाओं को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हो रहा रहा है। इस युवा महेात्सव में 2000 हजार गरीबों के बीच ठंड के समय गरम वस्त्र का वितरण किये गये। पढ़ाई और खेल के क्षेत्र में उत्कृट प्रर्दशन करने वाले छात्र छात्राओं को मेडल देकर सम्मानित किया गया।बुजुर्गो को शाॅल देकर सम्मानित किया गया। राष्ट्रीयकृत बैंकों के द्वारा ऋण शिविर आयोजित कर किसान, महिला समूह, उद्यमी, इत्यादि को बड़ी संख्या में ऋण उपलब्ध कराया गया। इस प्रकार के प्रयास से भारी संख्या में आमजन व युवा सीधे लाभान्वित हुए हैं। इन कार्यों के कारण जनसामान्य का विश्वास और समर्थन मिल रहा है जिससे हमारा उत्साह बढ़ा है। इसका परिणाम है कि हम चर्तुथ युवा महोत्सव का ओयाजन 12 जनवरी 2014 ई0 में और अधिक ऊर्जा के साथ किये। इस आयोजन में विशेष रूप से हजारों युवतियों को आमंत्रित किया गया। उन्हें अपना योग्यता का प्रर्दशन का अवसर प्रदान की गई। नारी शक्ति और उनका महत्व को प्रस्तुत किया गया। इस महोत्सव के भी मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के प्रतिपक्ष के नेता श्रीमान अर्जुन मुण्डा और हमारे सांसद श्रीमान रामटहल चैधरी जी हुए। उन्होंने युवाओं के अपरिमित ऊर्जा को साक्षात देखा और हमारा हौसला व उत्साह को अपने उ्द्बोधन से बढ़ाया। उन्होने हमें प्रेरित किया कि युवाओं की भागीदारी और उनमें विद्यमान अपरिमित ऊर्जा से सपनो का समृद्ध भारत बनाया जा सकता है। चतुर्थ ;थ्वतजीद्ध अपार जनसमर्थन के साथ राष्ट्रीय युवा विकास के तत्वावधान में 12 जनवरी 2014 ई0 युवा दिवस के अवसर पर चतुर्थ युवा महोत्सव आयोजित की गई। हमारे प्रयास को पंख देने वाले लोकप्रिय नेता श्रीमान् अर्जुन मुण्डा, नेता प्रतिपक्ष और सांसद रामटहल चैधरी जी मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान हुए। सन् 2014 का वर्ष बेटी का वर्ष सरकार के द्वारा घोषित वर्ष था। इस बेटी का वर्ष का समाज के लिए अत्यंत उपायुक्त राँची एवं बी.डी.ओ. काँके।

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महत्वपूर्ण कदम था। सरकार द्वारा घोषित बेटी के वर्ष के अवधारणा को हमने सही रूप में समझा और निर्णय लिये कि इस आयोजन को युवतियों के नाम की जाए और किया। इस आयोजन में हजारों युवतियों को एक मंच पर आमंत्रित कियें। सपनो के समृद्ध भारत के निर्माण में युवतियांे की भूमिका को बतलाया गया। आयोजन में आमंत्रित व शामिल जनसमूह को उदाहरण के साथ सत्य से अवगत कराया गया कि बेटी हमारी समाज की धूरी है। बेटी से ही हम सबका अस्तित्व है। इन्हें हम जितना बढ़ाएँगे उतना ही हमारी उन्नति होगी। हमने युवतियों को अपने प्रतिभा के प्रदर्शन का अवसर प्रदान किया जहाँ उन्होने सिद्ध किया कि वे किसी से कम नहीं है। कार्यक्रम के अतिथियों ने उनकी प्रतिभा को देखकर काफी प्रभावित हुए। अतिथियों ने अपने उद्बोधनों के द्वारा युवतियों को प्रोत्साहित व प्रेरित कियें। संघ के द्वारा सैकड़ो युवतियों को कई प्रकार से मद्द की गई। अतिथियों के द्वारा युवतियों को सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर युवतियाँ गौरवान्वित हुई जिससे उनमें ऊर्जा का संचार हुआ। इस आयोजन में हमारे राष्ट्रीय बैंक शामिल हुए और बैंक के द्वारा 30 महिला समूह, किसान, विद्यार्थी एवं बेरोजगार युवको को बैंक से ऋण दिया गया। विभिन्न संगठन के कौशल विकास से संबंधित 20 स्टाॅल लगाकर इससे प्राप्त होने वाले लाभ को विस्तार से बताया गया। विशेष कर बेरोजगारी जैसी राष्ट्र व्यापी समस्या को स्वरोजगार में ही नियंत्रण किया जा सकता है। ऐसे महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी तार्किक रूप से लोगों को दी गई। इस प्रकार के आयोजन के अपेक्षित परिणाम मिलें। इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए 27 मई को ग्राम ओयना में एक विवाह मण्डप को आयोजन हुआ। इस विवाह मण्डप में गरीब लड़कियों का विवाह कराया गया। इस विवाह मण्डप के मुख्य अथिति के रूप में लोकप्रिय नेता और पूर्व मुख्यमंत्री झारखण्ड, एवं निवर्तमान सांसद, दुमका श्रीमान् शिबू सोरेन जी उपस्थित हुए। उन्होंने युवाओं के प्रयास को देखा और सराहा व प्रोत्साहित किया। युवाओं के द्वारा सक्रिय रूप से विभिन्न प्रकार से जन कल्याण के कार्य में भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। युवाओं के भागीदारी से बहुत हद तक जन सामान्य को लाभ प्राप्त हो रहा है। युवाओं के द्वारा अपने संस्कार से विशेष कर वृद्धा और विधवा जनो को मद्द किया जा रहा है। इन कार्यो के परिणाम स्वरूप क्षेत्र के जनसामान्य का समर्थन प्राप्त हो रहा है। इस प्रकार के समर्थन से संघ को बहुत उपयोगी ऊर्जा प्राप्त हो रहा है और इसी ऊर्जा से पूरी शक्ति के साथ 2015 में भव्य युवा महोत्सव का आयोजन का निर्णय हुआ। 2015 के महोत्सव के लिए निर्णय लिये गए कि सरकारी योजनाओं के लाभ को लोगों तक पहुँचाने में भी युवा शक्ति का उपयोग किया जाए। सूक्ष्म स्तर पर इस कार्य का प्रारंभ ओयना के जतरा टाॅड मैदान से किया गया। इस आयोजन
में लोगों की भारी भीड़ जमा हुई और सब ने हमें सराहा सभी वर्गो का पूर्ण समर्थन मिला है। ऐसे समर्थन से आशा का संचार हुआ कि हम सपनों का समृद्ध भारत बनाने में कामयाब होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिबू सोरेन, प्रमुख सुदेश उराँव, शकील, बबलू, सुनिल एवं अन्य।

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीय युवा विकास संघ
पंचम ;थ्पजिीद्ध

प्रयास से अनुभव प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय युवा विकास संघ के तत्वावधान में 12 जनवरी 2015 ई0 को
युवा दिवस के अवसर पर पंचम युवा महोत्सव आयोजित की गई और हमारे प्रयास को पंख देने वाले लोकप्रिय नेता उच्च पदाधिकारी, शाखा प्रबंधक, उद्यमी,चिकित्सक मंच पर विराजमान हुए। विशेष रूप से इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री, श्रीमान् नील कंठ सिंह मुण्डा, झारखण्ड सरकार, सांसद राँची श्रीमान् रामटहल चैधरी, विधायक श्रीमान् रामकुमार पहान जी, विधायक कांके श्रीमान् जीतुचरण राम जी, उपायुक्त राँची श्री विनय कुमार चैबे जी, बी.डी.ओं. कांके, श्रीमान् गौतम प्रसाद साहु, सी.ओ. काके, श्रीमान् अनवर हुसैन जी, थाना प्रभारी, अभियंता, बैंक शाखा प्रबंधक, पदाधिकारीगण उपस्थित हुए। सन् 2015 का वर्ष को सरकार कौशल विकास का वर्ष के रूप में घोषित की गई। संघ के द्वारा कौशल विकास के महत्व और स्किल्ड से काम करने के तरीको को बतलाया गया। 50 से अधिक स्टाॅल लगाकर लोगों को उपयोगी जानकारी दी गई। विशेष रूप से कौशल विकास, मेक इन इण्डिया, डिजिटल इण्डिया, स्चच्छ भारत, स्किल्ड भारत को कैसे सफल किया जा सकता है, इस पर जोर दिया गया। मुख्यमंत्री साड़ी-धोती योजना का शुभांरम्भ उपायुक्त राँची, श्री विनय कुमार चैबे जी के गरीमामयी उपस्थिति में उन्हीं के द्वारा किया गया। अपोलो, अस्पताल इरबा, मेडिका अस्पताल, बुट्टी, राँची, विकास नर्सिंग होम, नेवरी विकास, सदर अस्पताल राँची के द्वारा कैम्प लगाकर हजारों लोगों
का स्वास्थ्य जाँच किया किया। बिहार आई बैंक ट्रस्ट के द्वारा अनेंक बुजुर्गों का नेत्र जाँच और निःशुल्क मोतियाबिन्द आॅपरेशन किया गया। बालिका और बालक वर्ग के लिए रनिंग फुटबाॅल गोल्ड कप प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन में विशेष रूप से हजारों युवक और युवतियों को एक मंच पर आमंत्रित किये गये। उन्हें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान किया गया जहाँ उन्होने सिद्ध किया कि वास्तव में उनमें असीम ऊर्जा और क्षमता विद्यमान है। कार्यक्रम के अथितियों ने उनकी प्रतिभा को देखा और उन्हें अपने उद्बोधन के द्वारा प्रोत्साहित किया। सैकड़ो युवक और युवतियों को कई प्रकार से मदद की गई। सभी प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा सम्मानित किया गया। आयोजन में कई महिला समूह आयोजन का शोभा बढ़ा रही थीं। इस आयोजन में स्टेट बैंक आॅफ इण्डिया, नेवरी शाखा और इण्डियन ओवरसीज बैंक, नेवरी शाखा के द्वारा कई महिला समूह, किसानों, विद्यार्थियों एंव बेरोजगार युवकों को ऋण दिया गया। कौशल विकास से संबंधित 50 स्टाॅल लगाकर कौशल का प्रदर्शन और इससे प्राप्त
लाभ को विस्तार से बताया गया। इस युवा महोत्सव में नेता मंत्री, अधिकारी और उद्यमियों नें युवाओं के प्रतिभा को प्रत्यक्ष देखा और अपने अनुभव ज्ञान से संघ के उत्साह को और बढ़ाया साथ ही हर स्तर पर मदद का आश्वासन दियें। आयोजन में शामिल सभी ने यह स्वीकार किया कि युवाओं के अपरिमित ऊर्जा प्रसिद्ध कलाकार श्रीमान् मुकुंद नायक के द्वारा नृत्य प्रस्तुत करते हुए

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को सुनियोजित कर भारत में व्याप्त गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निश्चित किया जा सकता है जिससे
कि समृद्ध भारत निर्माण होगा। इस कार्य से भी जनसमान्य का अपार समर्थन मिल रहा है जिससे हमारा उत्साह प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। हम लोगों के सहयोग के बल पर सम्पूर्ण भारत में इस प्रकार के आयोजन हो इसके लिए हम प्रयासरत व संकल्पित हैं। हमारी सरकार से सभी महत्वपूर्ण उद्देश्यों को प्रस्तुत करते हुए निवेदन भी कर रहें हैं कि युवाओं के लिए गांव स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उनमें विद्यमान विभिन्न प्रकार के प्रतिभा को प्रदर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जाए। सपनो के भारत के लिए हमारा प्रयास सदैव चलता रहेगा। इसी संदर्भ में हमारा चिंतन, विचार के द्वारा सृजित आइडिया कहता है कि सम्पूर्ण भारत में एक सशक्त प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित कर युवाओं के अपरिमित ऊर्जा को सुनियोजित किया जा सकता
है। युवाओं का सशक्त व प्रतिबद्ध संगठन उन्हें प्रत्येक स्तर पर मार्गदर्शन करेगा। संगठन के तत्वावधान में युवाओं के प्रतिभा का प्रदर्शन होगा जहाँ उसे जाँचा व परखा जाएगा तथा उसके प्रतिभा के अनुरूप उसे दिशा दिखाया जाएगा। इस प्रकार एक तंत्र राष्ट्रीय स्तर पर निर्माण की आवश्यकता और हमारा संकल्प है कि हमारे चिंतन के अनुरूप भारत में एक सशक्त युवा संगठन का निर्माण सभी के सहयोग से करेंगे। हमारा विश्वास है कि हमारी शुद्ध और सही सोच समय से आकार लेगी जिससे हमारे बीच एक प्रतिबद्ध युवा संगठन के रूप में ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ का राष्ट्रीय स्तर पर उदय होगा। हमें विश्वास है कि विविध भारत के विविध गंभीर समस्याओं को सद्भाव पूर्ण वातावरण में निदान कर सकेंगे। हमारी सफलता में एक समृद्ध भारत का सपना है जो सभी के योगदान से सकार होगा। ‘‘राष्ट्रीय युवा विकास संघ’’ के अपने कर्मयोगी सभी सदस्य अपने नागरिक अधिकार और कत्र्तव्य को
आधार बना कर राष्ट्र और राज्य के विकास के लिए काम कर रहें हैं। संघ किसी प्रकार का पारिश्रामिक या वेतन या भत्ता या अन्य किसी भी प्रकार का अर्थिक लाभ पाने के लिए प्रयास नहीं करता है न ही भविष्य में करेगा। हमारा एक मात्र संकल्प है कि भारत में एक सशक्त प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित किया जाए। युवाओं का अपार अपरिमित ऊर्जा को सुनियोजित कर समृद्ध भारत बनाया जाए। यह हम सब 1 अरब 25 करोड़ मानव की आवश्यकता है और हम जानते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। हम सफल होंगे ऐसा हमारा पूर्ण विश्वास है। अतः सरकार और समाज से निवेदन कर रहें हैं कि राष्ट्रीय स्तर का प्रतिवद्ध सशक्त युवा संगठन के निर्माण के लिए आगे आएँ, आप में सृजन की असीम संभावनाएँ हैं। हमें विश्वास है कि आप सभी का एक सशक्त व प्रतिवद्ध युवा संगठन के निर्माण के लिए अपना योगदान सुनिश्चित करंेगे। इस प्रकार के सशक्त राष्ट्रीय स्तर के युवा संगठन के द्वारा युवाओं के अपार अपरिमित ऊर्जा को राष्ट्र के निर्माण में सदूपयोग करने में सफल होंगे। ईश्वर ने इतनी बड़ी स्वभाविक शक्ति का स्वामी बनाया है और यह हमारा सौभाग्य है, इस युवा शक्ति के द्वारा भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाया जा सकता है। सपनो का समृद्ध भारत ही एक मात्र हमारा संकल्प है और संकल्प की प्राप्ति के लिए रात-दिन सक्रिय रूप से प्रत्येक स्तर से प्रयासरत हैं। षष्ठम ;ैपगजीद्ध हम अपने निरंतर प्रयास और अनुभव से ऊर्जा प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय युवा विकास के तत्वावधान में 12 जनवरी 2016 युवा दिवस के अवसर पर षष्ठम युवा महोत्सव आयोजित कियें और हमारे प्रयास को पंख देने वाले लोकप्रिय नेता उच्च पदाधिकारी, शाखा प्रबंधक, उद्यमी, चिकित्सक 26 संकल्प से सिद्धि की ओर
राष्ट्रीय युवा विकास संघ मंच पर विराजमान हुए। विशेष रूप से इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामले के मंत्री, श्रीमान् मुख्तार अब्बास नकवी, राज्य के मा0 युवा मामले के मंत्री अमर कुमार बाउरी, श्रीमान् रामटहल चैधरी, मा0 सांसद रांची, मा0 विधायक श्रीमान्
रामकुमार पहान जी, काँके बी.डी.ओ. श्रीमान् गौतम प्रसाद साहु, काँके सी ओ. श्रीमान् अनवर हुसैन जी, थाना प्रभारी, बैंक शाखा प्रबंधक, अभियंता, चिकित्सक, पदाधिकारीगण उपस्थित हुए। इस अवसर रा0 यु0 वि0 संघ के विजन का विमोचन करते हुए मा0 केन्द्रीय मंत्री एवं मा0 सांसद एवं अन्य
पर संघ अपने संकल्प के अनुरूप कार्य करने का संकल्प को दोहराते हुए अपने कार्यों का प्रर्दशन किया जिसे सभी ने काफी सराहा।सप्तम ;ैमअमदजीद्ध
संघ के सभी कर्मयोगी सदस्य अपने कत्र्तव्य के आगे उत्तरदायित्व को आधार बनाकर नवीन भारत के पुर्ननिर्माण के लिए पूर्ण रूप से संकल्पित हैं। हमारा एकमात्र संकल्प है कि भारत में एक शसक्त व प्रतिबद्ध युवा संगठन विकसित किया जाए और युवाओं में विद्यमान अपरिमित ऊर्जा को सुनियोजित कर समृद्ध भारत बनाया जाए। यह हम सब की आवश्यकता है और हम जानते हैं की हम सफल होंगे। हम अपने संकल्प की और बढ़ते हुए राष्ट्रीय युवा विकास संघ के तत्वावधान में सातवीं बार लगातार भव्य युवा महोत्सव आयोजित की गई और इस महोत्सव में राज्य के लोकप्रिय नेतागण, अधिकारीगण, प्रबंधकगण, उद्यमीगण, चिकित्सकगण शामिल हुए। इस महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास जी की गरिमामयी उपस्थिति हुई और हजारों युवाओं को उद्बोधन करते हुए राज्य में युवा निति बनाने की घोषणा की जिससे सभी अखबारों ने अपने मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया। इस महोत्सव में विशेष कर संघ के अभिभावक श्री रामटहल चैधरी मामनीय सांसद राँची, मा. विधायक श्री रामकुमार पाहन, श्री डाॅ. जितुचरण राम, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, अभियंता, थाना प्रभारी, चिकित्सक इत्यादि उपस्थित
हुए। इस अवसर पर संघ अपने संकल्प को प्रदर्शित करने में सफल रही और सबों ने राष्ट्रीय युवा विकास संघ को अपने संकल्प की ओर बढ़ने के लिए आर्शिवाद दिया।

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीीय युवुवा विकास संघ्ंघ
कार्य
परिणाम एवं अनुभव

 राष्ट्रीय युवा विकास संघ, बालिकाओं (युवतियों) एवं युवाओं के प्रतिभा को प्रदर्शित करने के लिए अवसर
उपलब्ध कराया जा रहा है जिससे बालिकाओं को सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। उनके मनोबल म ंे वृद्धि हुई है। साथ ही सगं ठन स े उन्ह ंे
आंशिक अर्थिक मद्द किया गया है। संगठन ने कई माध्यम से उनके प्रतिभा को हजारों जनों तक पहुँचाया है।
 महिला समूह को भी संगठन के द्वारा कई प्रकार से मदद की गई है। संघ के द्वारा कई नए समूह के निर्माण में मद्द तथा उन्हें हुनर प्रदान कर
रोजगार के लिए भी आर्थिक मदद की गई है।
 स्वच्छ भारत के लिए गांव के गरीब लोगों को शौचालय निर्माण के लिए मानसिक रूप से संघ के द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है, सरकार के द्वारा
दिये जा रहे प्रोत्साहन राशि के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराया जा रहा है।
 गरीब बच्चों को जो विद्यालय नहीं जाते हैं उन्हें विद्यालय में नामांकन कराने संबंध विगत कई वर्षों स े प्रयास किया जा रहा है। इस प्रयास से
सात वर्षाे ं म ंे लगभग 800 गरीब बच्चा ंे का े विद्यालय पहँुचाया गया है।
 वृद्ध जनों का कैम्प लगाकर निःशुल्क नेत्र जाँच व मोतियाबिंद का आॅपरेशन तथा चश्मा, गरम वस्त्र इत्यादि का वितरण किया गया है।
 सात वर्षों से हजारो जरूरत मदों को ठंड़ में गरम कपड़ों का वितरण किया गया है।
 प्रखण्ड के द्वारा चालाए जा रहे कल्याणकारी योजनाओं में आमजन को लाभार्थी बनाने में सहयोग किया जा रहा है।
 सामाजिक सुरक्षा योजना के अन्तर्गत अनेक लोगों को वृद्धा वो विधवा पेंशन का लाभार्थी बनाने में सहयोग किया गया है।
 जरूरतमंदों के लिए कैम्प आयोजित कर निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच की गई है एवं अवश्यक दवाईयाँ भी वितरण की गई हैं।
 सामाजिक सद्भावना को बढा़वा देने के लिए कार्य किया जा रहा है।
 वृद्ध जनों को समय-समय पर सम्मानित कर उनका मान सम्मान को बढ़ाया गया है।
 गरीब लड़कियो के विवाह में संघ का सीधा भूमिका रहा है और विवाह मण्डप आयोजित कर विवाह कराया गया है। मा0 मंत्री जी एवं अन्य गणमान्य
लोग मंच पर विराजमान 28 संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीय युवा विकास संघ
 सामाजिक संद्भावाना से संबंधित सभी धर्मों से संबंधित पवित्र ग्रंथ गीता, रामायण, कुरान, बाईबल,इत्यादि की हजारों प्रतियों को आम जन में वितरण
किया गया है।
 स्कूली बच्चों में गरम वस्त्र और कुछ पुस्तकों का भी वितरण किया गया है।
 ग्रामीण आधारभूत समस्या को सरकार तक पहुँचाया जा रहा है जिसके परिणामस्वरूप कई समस्या
का निराकरण हुआ है।
 सांसद वो विधायक को ग्रामीण समस्याओं से अवगत कराया जाता रहा है।
 बिजली समस्या और ग्रामीण विद्युतिकरण के लिए कार्य किया जा रहा है।
 भूमि अधिग्रहण एवं क्षतिपूर्ति भुगतान जैसे विषय पर भी रैयतों का मदद किया जा रहा है।
 सरकारी कार्यालय में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सरकार के सक्षम अधिकारी तक
सूचना पहूँचाया गया है।
 जिला उपायुक्त स्तर के अधिकारी को कई ग्रामीण समस्याओं की जानकारी दी जा रही है जिससे
समस्याओं का निराकरण हो रहा है।
 गरीब एवं मजदूरों का पलायन रोकने के लिए भी कार्य किया जा रहा है।
 प्रतिभावान युवाओं को काॅलेज में नामांकन पर मदद किया किया जा रहा है।
 समाज से भटके युवाओं को समझा बुझा कर समाज के मुख्य धारा में लाने का प्रयास किया गया है।
 जागरूकता अभियान चलाकर कई प्रकार से लागों को जागरूक बनाया जा रहा है।
 प्रधान मंत्री जनधन योजना के अन्तर्गत खाता खोलने के लिए लोगों को मद्द किया जा रहा है।
 भारत सरकार व राज्य सरकार के कार्यक्रमों की जानकारी लोगांे को दी जा रही है।
 किसानो के लिए उचित मार्गदर्शन और खेती से संबंधित विशेष बाते कृषि विशेषज्ञ के मदद से बताई जाती है।
 गांवो में लगातार नशा मुक्ति का अभियान चलाया जाता है और इस कार्य में महिलाओं से अगुवाई कराई जाती है।
 आम चुनावों में शांतिपूर्ण अच्छे प्रतिशत से मतदान के लिए चुनाव के ळनपकसपदम के अनुसार प्रयास किया गया है।
 सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक चेतना के लिए पिछले पाँच वर्षों से सकारात्मक कार्य किए जा रहे हैं।
 सामाजिक कुरीतियों को प्रभावी ढ़ग से समाज से सदा सर्वदा के लिए समाप्त करने के लिए प्रयास किया गया है।
 कन्या भ्रुणहत्या जैसे घटना को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता लाने का प्रयास किया गया है।
 युवतियों को स्वरोजगार से जोड कर आर्थिक समृद्धि को प्राप्त करने के लिए संघ द्वारा प्रयास किया गया हैं
 उपरोक्त के विन्दुओं के अलावे भी अन्य जनसामान्य से संबधित कार्य संघ अपने क्षमता के अनुसार अनवरत कर रहा है।

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीीय युवुवा विकास संघ्ंघ
भविष्य की संभावनाएँ
इसे देश में माॅडल के रूप में अपनाने से संभावित परिणाम-

 भारत के 80 करोड़ युवा मस्तिष्क और उनके 160 करोड़ हाथ को परस्पर प्रेम और बंघुत्व के डोर से जोड़ा जा
सकता है। इस विराट युवा शक्ति को परस्पर जोड़कर प्रत्येक हाथ को काम भी दिया जा सकता है।
 युवाओं को प्रेम और भाईचारा से जोड़कर सम्पूर्ण भारत में सद्भावना का वातावरण का निर्माण किया जा सकता है जो सभ्य समाज के लिए आवश्यक
है।
 युवाओं की बड़ी संख्या को आरोग्य बनाने में भी महत्पूर्ण योगदान होगा क्योंकि परस्पर जुड़ाव होने से अहम जानकारी और उपाय से सभी अच्छे से
अवगत होंगे। इसके साथ युवाओं में सुसंस्कार भी आएगा तथा ज्ञान का आदन – प्रदान होगा।
 युवाओं के एक प्रतिबद्ध संगठन के बल पर नक्सलवाद, आंतकवाद, जातिवाद, कट्टर पंथवाद,नशापान, भ्रष्टाचार, अपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण
स्थापित किया जा सकता है।
 युवाओं के संगठन के सहयोग से सरकार की जनहित कार्य को जनता तक सरलता से शत-प्रतिशत ससमय पहुँचाया जा सकेगा और इस महत्वपूर्ण
कार्य व्यवस्था में युवा एक सशक्त माध्यम बनेंगे।
 शसक्त युवा संगठन के सहयोग से सरकार नीतियाँ धरातल में सरलता से उतारा जा सकेगा साथ ही व्यवहारिक अव्यवारिक पहलुओं का पहचान होगा
जिससे सरकार की नीतियाँ सफल होंगे।
 युवाओं के संगठन से सरकार की नीतियाँ को जुड़ाव होने पर युवाओं की भूमिका बढ़ेगी और युवाओं का अपरिमित ऊर्जा राष्ट्र के सेवा के लिए लगेगा
जिससे राष्ट्र समृद्ध होगा।
 युवाओं संगठन के प्रत्यक्ष सहयोग से अधिक से अधिक जरूरतमंद गरीबों को लाभार्थी बनाया जा सकेगा। दलाली व्यवस्था समाप्त होगी तथा
जनसाधारण 100 शत् प्रतिशत लाभांवित होंगे।
 युवाओं का संगठन का दायित्व प्रदान करने से युवाओं को अपने कत्र्तव्य निर्वाह का व्यापक अवसर प्राप्त होगा जिसमें उनकी भी उन्नति होगी और
अनुभव प्राप्त करेंगे। राष्ट्र के सेवा में स्वयं को भागीदार पाकर गर्व की अनुभूति करेंगे।
 युवाओं के संगठन के सहयोग और सक्रियता से नौकरशाह पर नियंत्रण स्थापित होगा। सरकार तक भ्रष्टाचार की सूचना सरलता से पहुँचाया जा
सकेगा। इससे नौकरशाह के काम पर भी नियंत्रण स्थापित होगा जिससे नौकरशाह अपने कत्र्तव्य के प्रति सदैव सक्रिय रहेंगे। उनकी सक्रियता से
योजना ससमय धरातल पर पहुँच पाएगा।
 युवाओं के संगठन के प्रत्यक्ष भूमिका से कई प्रकार के बाधा को आसानी सें दूर किया जा सकता है जिससे लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता मिलेगी।
 युवाओं के संगठन के प्रत्यक्ष भागीदारी से प्रजातांत्रिक व्यवस्था और भी मजबूत होगा और शासन व्यवस्था में सुचिता आईगी।
 युवाओं के संगठन की भूमिका बढ़ने से उनमें प्रेरणा का संचार होगा जिससे उनका विश्वास और मनोबल बढ़ेगा जिससे नेता मंत्री पर भी नियंत्रण
होगा। नेता मंत्री अपने दयित्व से सदैव बंधे रहेंगे।

संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीय युवा विकास संघ

 युवाओं संगठन की भूमिका बढ़ने से युवा भारी संख्या सदैव सक्रिय रहेंगे। जिससे शासन व्यवस्था में नियंत्रण
स्थापित होगा। लड़ाई झगड़ो में कमी आएगी।
 युवाओं के संगठन सशक्त होने से युवा दायित्व से बंधे रहेंगे जिससे वे मानव मशीन नहीं बने रहेंगे और अपनी भूमिका से अपना समय देश और
राज्यहित में लगाएँगे।
 युवाओं के सशक्त संगठन के सहयोग से सरकार के महत्वकाक्षी योजना को ससमय और लाभार्थी तक सहजता और सरलता के साथ 100 प्रतिशत
लाभुक तक पहुँचाया जा सकता है। इस कार्य में युवाओं की ऊर्जा राष्ट्र हित में खर्च होगा।
 युवाओं के सशक्त संगठन के द्वारा राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक चेतना का जन्म होगा जिससे भी राष्ट्र समृद्ध होगा।
 युवाओं के सशक्त संगठन के द्वारा युवाओं में नेतृत्व क्षमता का विकास होगा जिससे वे घर से लेकर राज्य व देश नेतृत्व करने में सक्षम होंगे।
 युवाओं के सशक्त संगठन के द्वारा युवाओं को सामाजिक कार्य का अनुभव होगा जिससे सामाज में व्याप्त कई बुराई समाप्त किया जा सकता है।
 युवाओं के सशक्त संगठन को आमजन से सीधे जुड़ने का अवसर होगा जिससे वे भारत को सही अर्थ में समझ पाएँगंे और भारत को सही अर्थ में
समझ पाने से देश के गंभीर नक्सल समस्या पर भी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।
 युवाओं के सशक्त संगठन के सामाजिक कार्यों में सहभागित बढ़ने से मानव समाज समृद्ध होगा। जात-पात का दीवार नष्ट हेागा। युवाओं को अपनी
क्षमता सिद्ध करने का अवसर प्राप्त होगा।
 युवाओं के सशक्त संगठन की भूमिका से आम चुनाव अच्छे प्रतिशत के साथ शांतिपूर्ण होगा और प्रक्रिया में योग्य प्रत्याशी का चयन होगा जिससे
हमारी शासन व्यवस्था में स्वच्छता आएगा।
 युवाओं के सशक्त संगठन की भूमिका बढ़ने से युवाओं में असंतोष कम होगा। सरकार के प्रति विश्वास प्रगाढ़ होगा। अपनी भागीदारी से सकारात्मक
कार्य करेंगे जिससे अन्ततः भारत का नव निर्माण होगा।
 युवाओं के सशक्त संगठन की भूमिका से देश में जातिवाद, कट्टर पंथवाद, क्षेत्रवाद गंभीर समस्या का निदान होगा। सम्पूर्ण मानव समाज में सद्भावना
का विकास हेागा।
 युवाओं के सशक्त संगठन के द्वारा सम्पूर्ण भारत के युवा एक सूत्र में जुडं़ेगंे और यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक होगा। इस राष्ट्रीय एकता के द्वारा
सम्पूर्ण भारत में सद्भावना वातावरण बनेगा और स्थायी विकास होगा।
 युवाओं के सशक्त संगठन के द्वारा युद्ध, भूकम्प, भूखमरी, अकाल, बाढ़, दंगा, महामारी इत्यादि भीषण चुनौती का सामना करने में सक्षम होंगे।
समस्याओं का स्थायी हल हमारे पास स्वाभाविक रूप से उपलब्ध होगा।
 युवाओं के सशक्त संगठन के द्वारा दहेज, बाल विवाह, अंधविश्वास़, कन्या भ्रुण हत्या, इत्यादि कई समाजिक कुरितियों को सदा के लिए समाप्त
करने में सक्षम होंगे।
 युवाओं के सशक्त संगठन के द्वारा सम्पूर्ण भारत में सुसंस्कार विकसित कर वृद्धाओं व विधाओं के संकल्प से सिद्धि की ओर राष्ट्रीीय युवुवा विकास
संघ्ंघ म्ेजकण् 2010 31 म्ेजकण् 2010 जीवन को सुन्दर और स्वस्थ बनाया जा सकता है। वृद्ध और विधवा भी गरिमामय जीवन ऐसे सुसंस्कार
के बीच व्यतीत करेंगे।
 युवाओं के सशक्त संगठन की भूमिका से देश में व्याप्त अनेक गंभीर समस्याओं का निदान होगा। अतः हमारा मानना है कि हमारे चिंतन के द्वारा
सृजित आइडिया और अनुभव को एक समृद्ध भारत के निर्माण हेतु एक उपयोगी माॅडल के रूप में पूरे देश में लागू करने की आवश्यकता है।
 उपरोक्त के अलावे भी युवाओं के सशक्त संगठन से अन्य अच्छे दूरगामी परिणाम होंगे जिससे भारत का नवनिर्माण होगा और हमारा भारत सम्पूर्ण
विश्व को एक सुन्दर मार्ग से परिचय कराएगा।

निष्कर्ष: इतिहास साक्षी है कि मानव समाज पूर्ण रूप से संघर्षशील और परिवर्तनशील समाज रहा है, प्रत्येक कालखण्ड में समस्याएँ रहीं हैं और वर्तमान
में भी है। वर्तमान समस्याओं का हल हेतु हमारा यह नवीन प्रयास स्वस्थ परंपरा का नींव होगा और यह समृद्ध भारत के लिए सर्वोतम मार्ग भी
हो सकता है।
अंत में निवेदन पूर्वक कहना चाहता हूँ कि मैं भारत गणराज्य का एक सामान्य नागरिक हूँ‐मैं मानता हूँ कि मेरा भी दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशाील है,। मेरा उद्देश्य समृद्ध भारत के सपने के लिए एक सार्थक प्रयास करना है,। किसी पर दोषारोपन या प्रतिकुल टिप्पणी करने का नहीं है,। फिर भी यदि किसी के भावनाओं को ठेस पहुँचती है, तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ।
जय हिन्द! भारत माता की जय!
आपका
नरेन्द्र कुमार (संयोजक)
राष्ट्रीय युवा विकास संघ, झारखण्ड प्रदेश, राँची